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बजट में मोदी सरकार देशवासियों को दे सकती हैं UBI का तोहफा, हर एक के खाते में आएगी इतनी रकम

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आम चुनाव यानि लोकसभा चुनाव आने वाले हैं ऐसा में जाहिर है कि राजनितिक हलचल तेज हो गई है। तमाम राजनीतिक पार्टियां जनता को लुभाने के लिए वादों का जाल फेकने में लगी हुई हैं। हाल ही में राहुल गांधी ने बड़ा चुनावी ऐलान किया कि अगर केंद्र में कांग्रेस सरकार बनी तो हर गरीब को तय रकम दी जाएगी।

हालांकि यूबीआई जैसी स्कीम की घोषणा की उम्मीद पहले से ही की जा रही थी लेकिन अब राहुल के एलान के बाद मोदी सरकार पे प्रेशर बढ़ गया है। अब ये तय माना जा रहा है कि आगामी बजट में इसकी घोषणा की जा सकती है।

क्या है यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम

बता दें कि यूनिवर्सल बेसिक इनकम यानी UBI स्कीम के अंतर्गत सरकार देश के हर नागरिक को बिना शर्त एक तय रकम देगी

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मालूम हो कि पूर्व वित्तीय सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने साल 2016-17 के आर्थिक सर्वे में इस योजना को लागू करने की सिफारिश की थी.

वैसे ये बात कम लोग जानते होंगे कि यूपीए के शासन के दौरान भी इस स्कीम लागू करने का सुझाव आया था तब ये सुझाव प्रोफेसर गाय स्टैंडिंग ने सरकार को दिया था।

इसके अलावा बीजेपी ने भी राजस्थान के चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में यूनिवर्सल बेसिक इनकम देने का वादा किया था।

वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश की एक पंचायत में पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर ऐसी एक स्कीम को लागू किया था जिसके बेहद सकारात्मक नतीजे आए थे।

दरअसल इंदौर के 8 गांवों की 6,000 की आबादी के बीच 2010 से 2016 तक इस स्कीम का प्रयोग हुआ था। इसमें पुरुषों और महिलाओं को 500 रुपए दिए गए। बच्चों को हर महीने 150 रुपये दिए गए। इन 5 सालों में इनमें अधिकतर ने इस स्कीम का लाभ मिलने के बाद अपनी आय बढ़ा ली।

हालांकि अब राहुल गांधी के बयान के आ जाने से सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि अगर इस बजट में मोदी सरकार UBI स्कीम की घोषणा कर भी देती है तो ये जरूर कहा जाएगा कि कांग्रेस के दबाव की वजह से सरकार ने ये ऐलान किया है।

इस स्कीम से कैसे खत्म होगी गरीबी

एक्सपर्ट्स के मुताबिक आर्थिक दृष्टि से निचले पायदान की 75 % आबादी को UBI के दायरे में लाया जाए।

इसके अलावा सिर्फ महिलाओं को इसके दायरे में लाया जाए क्योंकि महिलाओं को कई मोर्चों पर पिछड़ेपन का सामना करना पड़ता है।

जानकारों के अनुसार आरंभ में यूबीआई स्कीम का लाभ विधवाओं, गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ वृद्ध एवं बीमार आबादी को दिया जाए।

और कहां लागू है यूनिवर्सल बेसिक इनकम जैसी स्कीम

और देशों की बात करें तो ईरान पहला देश है जिसने साल 2010 में नैशनल बेसिक इनकम शुरू की। यहां सब्सिडी के बदले नेशनल बेसिक इनकम दी जाती है।

इसके अलावा एलास्का में गरीबों को बेसिक इनकम दी जाती है। तेल से होने वाली कमाई से पैसा जुटाया जाता है।

वहीं अमेरिका के कैलिफॉर्निया शहर में फिलहाल प्रयोग के तौर पर 100 लोगों को 500 डॉलर यानी करीब 35 हजार रुपए दिए जा रहे हैं।

वैसे फिनलैंड में भी वर्ष 2017 में ये स्कीम शुरू हुई थी लेकिन फिलहाल इसको बंद कर दिया गया। इस स्कीम के अनुसार 2000 बेरोजगारों को 650 यूरो यानी करीब 53 हजार रुपए हर महीने दिए गए।

फ़्रांस में भी सरकार बेरोज़गारों को सालाना 7,000 यूरो देती है यानी करीब साढ़े पांच लाख रुपए। हर महीने 45 हजार रुपए।

फ्रांस के पड़ोसी जर्मनी में भी बेरोजगारों को हर महीने मिलते हैं करीब 30 हजार रुपए।

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