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अगर हकीकत बन गया राहुल गांधी का ये वादा, तो बढ़ जाएगा सरकार पर 1.5 लाख करोड़ का बोझ

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घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने एक अनुमान पेश किया है कि अगर आगामी बजट में गरीबों के लिए कोई इनकम सपोर्ट स्कीम का ऐलान होता है तो केंद्र सरकार इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। यानि अगर राहुल गांधी ‘न्यूनतम आय की गारंटी’ का वादा हकीकत का रूप लेता है तो केंद्र सरकार पर सालाना 1.5 लाख करोड़ रुपए या केंद्र और राज्यों पर मिलाकर कुल जीडीपी का 0.70 % बोझ पड़ेगा।

तेलंगाना की रितु बंधु स्कीम बन सकती है उदाहरण

इंडिया रेटिंग्स ने ये भी कहा कि तेलंगाना की रितु बंधु स्कीम की तरह केंद्र सरकार भी बजट में किसानों के लिए कोई राहत पैकेज का ऐलान कर सकती है। हालांकि एजेंसी ने ये साफ़ किया कि, ‘कर्ज माफी की तुलना में इनकम सपोर्ट स्कीम बेहतर विकल्प हो सकती है।’

कोई नई बात नहीं कृषि क्षेत्र में संकट

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इंडिया रेटिंग्स एजेंसी के मुताबिक कृषि क्षेत्र में संकट कोई नई बात नहीं है। इसके लिए कई सरकारें इस समस्या से लड़ने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पब्लिक स्पेंडिंग बढ़ाने, मिनिमम सपोर्ट प्राइस बढ़ाने, एग्रीकल्चर क्रेडिट बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, कृषि कर्जों को बट्टे खाते में डालना, डायरेक्ट इनकम सपोर्ट बढ़ाने आदि कई उपाय करती रही हैं। जिससे इस क्षेत्र के संकट दूर हों।

छ्त्तीसगढ़ में राहुल गांधी ने किया था एलान

मालूम हो कि सोमवार को छत्तीसगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि यदि केंद्र में कांग्रेस सरकार बनी तो सभी परिवारों को न्यूनतम आय की गारंटी का अधिकार दिया जाएगा।

यूपीए सरकार की तारीफ करते हुए मोदी सरकार पर किया हमला

छत्तीसगढ़ में एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोला और उसे उद्योगपतियों के हितैषी तथा किसान एवं गरीब के विरोधी वाली सरकार करार दिया।

उन्होंने कहा कि कोंग्रेस ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून यानि कि मनरेगा के जरिए लोगों को रोजगार, भोजन का अधिकार दिया और सूचना अधिकार जैसे कानून के तहत ब्यूरोक्रेसी के बन्द दरवाजों को खोलने का काम कांग्रेस ने किया और अब वर्ष 2019 में सत्ता में आने पर गरीबों को वह न्यूनतम आय की गारंटी का अधिकार प्रदान करेगी।

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