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13 साल की उम्र में लगा मैं अलग हूं…अपनाया इस्लाम रोजे रखे, हज भी गई और फिर एक फैसले ने बदल दी जिंदगी

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प्रयागराज में इन दिनों धर्म की सबसे बड़ी सभा लगी हुई है। जी हां, दरअसल यहां कुंभ मेला लगा हुआ है। इस कुंभ में देश-विदेश से आए करोड़ों लोग पावन गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। यहां भारी तादाद में साधु-संत भी आए हुए हैं।

कई अखाड़ों ने इस बार शिरकत की है

हालांकि इस बार के कुंभ में हर बार की तरह 13 नहीं बल्कि 14 अखाड़ों ने शिरकत की है। जी हां, दरअसल 14वें अखाड़े के रूप में किन्नर अखाड़े को शामिल किया गया है। इस अखाड़े की महामंडलेश्वर मां भवानी नाथ वाल्मीकि हैं। आइए जानते हैं कि कौन हैं मां भवानी।

शबनम से बनीं मां भवानी

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बात दें कि महामंडलेश्वर भवानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी जिंदगी काफी मुश्किल और चुनोतीपूर्ण रही है। उनका परिवार बेहद गरीब था।

मां भवानी के मुताबिक 17 नवंबर 1972 को दिल्ली के चाणक्यपुरी में उनका जन्म हुआ था। शुरुआत में आम जीवन ही था लेकिन 13 साल की उम्र में पता चला था कि वो बाकियों से अलग हैं। इसके अलावा भवानी ने वर्ष 2011 में हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपना लिया था।

हज यात्रा भी कर चुकी हैं

कमाल की बात ये भी है कि मां भवानी इस्लाम धर्म अपनाने के बाद साल 2012 में हज यात्रा भी कर चुकी हैं। हालांकि इसके 5 साल बाद उन्होंने दोबारा हिंदू धर्म अपना लिया।

वे साल 2016 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के किन्नर अखाड़े में धर्मगुरु बनी थीं। उन्हें स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने साल 2017 में महामंडलेश्वर की उपाधि दी थी।

किन्नर अखाड़े की स्थापना की

साल 2015 में लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के साथ मिलकर मां भवानी ने किन्नर अखाड़े की स्थापना की। जैसा की हमने बताया कि उन्हें स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने साल 2017 में महामंडलेश्वर की उपाधि दी।

मालूम हो कि प्रयागराज कुंभ में भी मां भवानी किन्नर अखाड़े की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। वे अखाड़े में हर छोटी-बड़ी चीज का ध्यान रखती हैं। इसके अलावा वो श्रद्धालुओं और अखाड़े के सदस्यों के लिए बनने वाले खाने की व्यवस्था खुद ही चेक करती हैं।

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