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मोदी सरकार की इस योजना ने किया कमाल, भारत में गरीबी के आंकड़ों में आई कमी

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गरीबी पर विपक्ष के निशाने पर रहने वाली केंद्र सरकार का ने अब दावा किया है कि हाल के वर्षों में भारत में गरीबी घटने की गति तेज हो गई है। दरअसल इस मामले में ग्लोबल बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2018 के साथ-साथ ब्रूकिंग्‍स इंस्‍टीट्यूशन द्वारा प्रकाशित एक नोट से यह तथ्‍य उभर कर सामने आया है।

मालूम हो कि इस संबंध में केंद्र सरकार के मुताबिक इस दिशा में दीनदयाल अंत्‍योदय योजना, राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन काफी कारगर साबित हुई है।

तो चलिए जानते हैं इस योजना की क्या है खासियत।

9 करोड़ परिवारों को जोड़ती है ये योजना

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बता दें कि ये स्कीम मिनिस्ट्री ऑफ रूरल डेवलपमेंट द्वारा चलाई जा रही है। दरअसल इस स्कीम का मकसद स्‍वयं सहायता समूहों यानि कि एसएचजी के माध्यम से देश भर में लगभग 9 करोड़ परिवारों को जोड़ना है और उन्‍हें टिकाऊ आजीविका के अवसरों से जोड़ना है। अप्रैल 2014-नवम्‍बर 2018 के दौरान इस योजना की प्रगति इस प्रकार रही:

मिशन फुटप्रिंट: मालूम हो कि इस पीरियड के दौरान 2411 अतिरिक्‍त ब्‍लॉकों को ‘गहन’ रणनीति के दायरे में लाया गया है। बता दें कि इस मिशन को सुचारू रूप से 29 राज्‍यों और 5 केन्‍द्र शासित प्रदेशों के 612 जिलों में फैले 5,123 ब्‍लॉकों में चलाया जा रहा है।

इतनी ग्रामीण महिलाओं को किया गया एसएचजी में संगठित

बता दें कि अप्रैल 2014 और नवम्‍बर 2018 के बीच 3 करोड़ से भी अधिक ग्रामीण निर्धन महिलाओं को देश भर में 26.9 लाख स्‍वयं सहायता समूहों यानि कि एसएचजी में संगठित किया गया है। कुल फिगर की बात करें तो टोटल 5.63 करोड़ से भी अधिक महिलाओं को 49.7 लाख से ज्‍यादा एसएचजी में संगठित किया गया है।

दी गई 5030 करोड़ रुपए की धनराशि

बता दें कि इन सामुदायिक संस्‍थानों को पूंजी सहायता के रूप में 5,919.71 करोड़ रुपये से भी अधिक की राशि दी गई है। मालूम हो कि इसमें से लगभग 85 % रकम यानि कि 5030.7 करोड़ रुपये उपर्युक्‍त अवधि के दौरान उपलब्‍ध कराई गई है।

उठाया गया 1.96 लाख करोड़ के लोन का फायदा

मालूम हो कि पिछले 5 सालों के दौरान एसएचजी द्वारा कुल 1.96 लाख करोड़ रुपये के बैंक ऋण से लाभ उठाया गया है।

35.92 लाख महिला किसानों को जोड़ने का हुआ काम

महिला किसानों की आमदनी बढ़ाने और माल से रिलेटड लागतों एवं जोखिमों में कमी करने के लिए उठाए गए कदमों को बढ़ावा देने के लिए महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना यानि कि एमकेएसपी को कार्यान्वित किया जा रहा है।

बता दें कि अप्रैल 2014 से लेकर नवम्‍बर 2018 तक के पीरियड के दौरान लगभग 3 लाख और महिला किसानों को एमकेएसपी के दायरे में लाया गया है। अब तक कुल 35.92 लाख महिला किसानों को इस परियोजना में लाया जा चुका है।

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