Loading...

कैसे और किस तरह की साधना करते हैं अघोरी बाबा, आखिर क्यों रहते हैं एकांत या शमशान में

0 30

प्रयागराज में इन दिनों धर्म की सबसे बड़ी सभा लगी हुई है। जी हां, दरअसल यहां कुंभ मेला लगा हुआ है। इस कुंभ में देश-विदेश से आए करोड़ों लोग पावन गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। यहां भारी तादाद में साधु-संत भी आए हुए हैं।

यहां हर साल खास आकर्षण का केंद्र होते हैं नागा साधु और अघोरी। आज हम आपको अघोरियों के बारे में बताने जा रहे हैं। मालूम हो कि अघोरियों का जीवन जितना कठिन है उतना ही रहस्यमयी भी है।

अघोरी बाबा कौन होते हैं

बता दें कि अघोरियों का जीवन बेहद ही रहस्यमयी होता है। उनकी अपनी शैली, अपना विधान है, अपनी अलग विधियां हैं। अघोरी उसे कहते हैं जो घोर नहीं हो। यानी बहुत सरल और सहज हो। जिसके मन में कोई भेदभाव नहीं हो।

Loading...

कहते हैं कि अघोरी हर चीज में समान भाव रखते हैं। वे सड़ते जीव के मांस को भी उतना ही स्वाद लेकर खाते हैं जितना स्वादिष्ट पकवानों को स्वाद लेकर खाया जाता है।

कैसी है अघोरियों की दुनिया

अघोरियों की कई बातें ऐसी हैं जो सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। चलिए बताते हैं अघोरियों की दुनिया की कुछ ऐसी बातें जिनको पढ़कर आपको एहसास होगा कि वे कितनी कठिन साधना करते हैं।

बता दें कि अघोरी दरअसल तीन तरह की साधनाएं करते हैं। शिव, शव और श्मशान साधना। शिव साधना में शव यानि कि मुर्दा के ऊपर पैर रखकर साधना की जाती है।

वहीं शव साधना शव पर बैठकर की जाती है। कहा जाता है कि ऐसी साधनाओं में मुर्दे को प्रसाद के रूप में मांस और शराब चढ़ाई जाती है।

तीसरी होती है श्मशान साधना। इसमें जहां शवों को जलाते हैं उसकी पूजा की जाती है। उस पर गंगा जल व मावा चढ़ाया जाता है।

कहते हैं कि अघोरी बाबा बहुत हठी होते हैं, अगर किसी बात पर अड़ जाएं तो उसे पूरा करते हैं। गुस्सा हो जाएं तो किसी भी हद तक जा सकते हैं।

कहा जाता है कि अघोरी गले में धातु की बनी नरमुंड की माला पहनते हैं।

अघोरी ज़्यादातर श्मशान में ही रहते हैं। वे यहीं अपनी कुटिया बनाते हैं। उनको श्मशान में रहना ज़्यादा पसन्द होता है।

बता दें कि अघोरियों की कुटियां में एक छोटी सी धूनी हमेशा जलती रहती है ये बेहद आवश्यक है उनके लिए। जानवरों में वो सिर्फ कुत्ते पालना पसंद करते हैं।

बता दें कि अघोरी वैसे तो साधू होते हैं लेकिन ये मांस मदिरा का सेवन करते हैं। अघोरी गाय का मांस छोड़ कर बाकी सब मांस खा सकते हैं। मल से लेकर मुर्दे का मांस तक। प्यास लगने पर खुद का मूत्र भी पी लेते हैं।

कहा तो ये भी जाता है कि अघोरी पराशक्तियों यानि कि आत्मा को भी अपने वश में कर सकते हैं। यही कारण है कि वो साधनाएं भी श्मशान में ही करते हैं।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.