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कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की दवाएं होंगी सस्ती, नीति आयोग की है योजना

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दवाइयों के प्राइस को रेगुलेट करने के लिए नीति आयोग ने एक फैसला लिया है। जी हां, दरअसल नीति आयोग के अंतर्गत एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है जो नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन यानि कि NLEM से बाहर के ड्रग्स की पहचान करेगी और उनकी कीमत तय करने का सुझाव देगी।

बता दें कि दवाइयों की कीमत तय करने का अधिकार नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी यानि कि NPPA के पास है। मालूम हो कि NPPA एक ऑटोनोमस बॉडी है। यह नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन के तहत आती है।

गंभीर बीमारियों का इलाज सस्ता करना है लक्ष्य

इस संबंध में नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल और ड्रग्स एंड हेल्थ प्रोडक्ट की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन ने भी अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा कि हम कीमत का निर्धारण लोगों की जरूरतों के हिसाब से करेंगे। इसमें कैंसर जैसी दवाएं शामिल हो सकती हैं। इससे इन गंभीर बीमारियों का इलाज सस्ता हो सकेगा।

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उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि ऐसा करने के पीछे NPPA के अधिकारों या उसकी पावर को कम करना नहीं है बल्कि हमारा मानना है कि NPPA को स्वतंत्र और मजूबत किया जाना चाहिए।

कैंसर की दवा Mrp से 1450 रुपए महंगी बिकती हैं

बता दें कि सरकार के आंकड़ों के मुताबिक फॉर्मास्यूटिकल कंपनी कैंसर जैसी दवाओं को MRP से 1450 रुपए महंगा बेच रही हैं। सरकार की कोशिश है कि कीमत को कम करना और सही से निर्धारित करना सरकार का लक्ष्य है।

ये सदस्य होंगे नीति आयोग की समिति में शामिल

बता दें कि नीति आयोग की उच्च स्तरीय समिति में वित्त, हेल्थ और कॉमर्स जैसे कई मंत्रालयों के ब्यूरोक्रैट, डिपार्टमेंट ऑफ फॉर्मास्यूटिकल DoP के सदस्यो को शामिल किया जाएगा।

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