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किसान पैकेज से हो सकती है फिस्कल डेफिसिट में वृद्धि, मूडीज ने केन्द्र सरकार को किया आगाह

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विश्व की चर्चित क्रेडिट रेटिंग कंपनी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत की केंद्र सरकार को उनके द्वारा उठाए जाने वाले कुछ कदमों को लेकर चेताया है।

दरअसल मूडीज ने कहा है कि सरकार के एमएसएमई सेक्टर को रियायतें देने के किए गए ऐलान और किसानों की मदद करने के लिए प्रस्तावित उपाय सही नहीं हैं।

जी हां, दरअसल ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि इससे चालू वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय तंगी और फिस्कल डेफिसिट जीडीपी की तुलना में 3.4 % से ज्यादा होने का रिस्क बढ़ जाएगा।

मालूम हो कि केंद्र सरकार ने पिछले बजट में चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी की तुलना में 3.3 % फीसदी फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य तय किया था। हालांकि ऐसा होता नहीं दिख रहा है।

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मूडीज ने बोला कोई शॉर्ट टर्म रास्ता निकालें

जानकारी के लिए बता दें कि मूडीज ने कहा कि इस समय सरकार को कोई शार्ट टर्म उपाय सोचना होगा। मूडीज का कहना है कि रेवेन्यू बढ़ाने के नए उपाय नहीं किए जाने से सरकार के लिए राजकोषीय मजबूती के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो जाएगा।

मूडीज का कहना है कि रिजर्व बैंक से मिले स्पेशल डिविडेंड और कैपिटल एक्सपेंडिचर में कटौती करके फिलहाल शॉर्ट टर्म राहत दिए जाने की योजना सरकार बनाए।

मजबूत राजकोषीय लक्ष्य से चूक सकता है भारत

बता दें कि आम चुनाव से पहले कई कदम उठाए जाने की संभावनाएं हैं, इनको देखते हुए ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि, ‘ ये कोई स्थायी उपाय नहीं हैं। अगर प्रस्तावित उपायों को लागू किया जाता है तो भारत राजकोषीय मजबूती के लक्ष्य से चूक जाएगा।”

यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार वित्त वर्ष 2019 और 2020 में फिस्कल डेफिसिट को क्रमशः 3.1 % और 3 % तक घटाने के लक्ष्य पर काम कर रही है।

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