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1 किमी पैदल चलने पर ये ऐप दान करती है 10 रुपए, अब तक 40 लाख किमी चलकर दान कर चुकी है 4 करोड रुपए

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कहते हैं कि कभी कभार मज़ाक मज़ाक में किया गया कोई काम किसी बेहतरीन आइडिए के रूप में जन्म लेकर आपको चौंका सकता है। जी हां, ऐसा ही कुछ आईआईटी में पढ़ने वालेदो दोस्तों के संग हुआ।

दरअसल ईशान नाडकर्णी और निखिल खंडेलवाल नामक दो दोस्तों में एक बार 1000 रुपए की शर्त लगी। शर्त ये थी कि सात दिन तक रोज सात किमी दौड़ना था। इस शर्तरूपी चेलेंज को ईशान नाडकर्णी ने पूरा कर लिया और निखिल खंडेलवाल को शर्त के मुताबिक 1,000 रुपए देने पड़े।

अब शर्त के मुताबिक निखिल ने पैसे दिए जरूर हालांकि ईशान को नहीं बल्कि सामाजिक संस्था को दान के रूप में। यहीं से ‘इम्पैक्ट’ ऐप का आइडिया आया।

जी हां, ईशान और निखिल ने अपने दोस्तों को साथ लिया और लग गए मिशन में। अब इम्पैक्ट ऐप के साथ हर एक किलोमीटर पैदल चलने पर 10 रुपए सामाजिक संस्थाओं को दान किए जाते हैं।

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पैसा आता है सीएसआर फंड से, दान के लिए संस्था का चुनाव यूजर करते हैं

ईशान नाडकर्णी जोकि इम्पैक्ट के सीईओ हैं उनके मुताबिक आरती इंडस्ट्रीज, हीरो मोटोकॉर्प, वेलस्पन, एसबीआई, डीएचएल और हिमालया जैसी कंपनियां अपने सीएसआर फंड से यह रकम देती हैं।

इसके अलावा रकम किस संस्था को जाए यह चुनाव यूजर कर सकता है। पैदल चलने और दौड़ने से जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाई जाती है।

अगस्त 2016 में हुई लॉन्च, यूज़र्स पहुंचे 1 लाख के पार

इम्पैक्ट ऐप के सीईओ ईशान के मुताबिक अगस्त 2016 में लॉन्चिंग के बाद से अब तक एक लाख से ज्यादा लोग इस एप को डाउनलोड हो चुके हैं। इनमें 95 हजार यूजर्स देश में और 5 हजार विदेश में हैं।

4 करोड़ रुपए की मदद मिल चुकी है अब तक

बताया गया कि अब तक लोगों ने 40 लाख किमी पैदल चलकर 4 करोड़ रुपए की मदद विभिन्न नॉन-प्रॉफिट संस्थाओं तक पहुंचाई है।

इसमें सूखे की मार झेल रहे 300 किसान परिवार, शहीदों के 70 परिवार, मुंबई की झुग्गी-बस्ती की 100 महिलाओं को आर्थिक मदद मिली है।

इनके अलावा इस मदद में महाराष्ट्र के जलगांव में 11,250 पौधों का रोपण, 385 स्कूलों के छात्रों को एक साल तक भोजन कराने के साथ-साथ एक हजार युवकों को रोजगार प्रशिक्षण देना शामिल है।

ज़्यादा लोगों के लिए कंपनी करा रही प्रतिस्पर्धा

बता दें कि इम्पैक्ट ऐप से ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़े इसके लिए कंपनी लोगों को इस कमाल के मिशन में शामिल करने के लिए कम्पीटिशन करा रही है। दरअसल कंपनियों में जाकर टीम बनाई जाती है। उन्हें एक-डेढ़ माह तक दौड़ने, चलने का लक्ष्य दिया जाता है।

इसके बाद अच्छा परफॉर्म करने वाली टीम को सम्मानित भी किया जाता है। जो फंड इकट्ठा होता है उसे किसी सामाजिक संस्था को दिया जाता है। मालूम हो कि अब तक 19 कम्पीटिशन आयोजित हो चुके हैं।

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