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लड़की ने पहले दुल्हन जैसा श्रृंगार किया, फिर सारे गहने उतारकर दे दिए मां को, आखिर में त्याग दिए बाल

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आज हम आपको 22 साल की उम्र में साध्वी बनी एक लड़की के बारे में बताने जा रहे हैं। जी हां, दरअसल बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स में सोमवार को मुमुक्षु सिमरन जैन नाम की लड़की का दीक्षा महोत्सव हुआ।

इस दीक्षा के बाद मुमुक्षु 22 साल की सिमरन साध्वी गौतमी श्रीजी मसा बन गईं। श्री वर्धमान श्वेतांबर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ट्रस्ट के तत्वावधान में दीक्षा महोत्सव हुआ।

इसके पहले रविवार को सिमरन ने हाथों पर मेंहदी रचाई थी और परिजनों के साथ वक्त बिताया था। उन्होंने इच्छानुसार अंतिम बार मनपसंद खाना भी खाया था।

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सिमरन बोलीं- वैराग्य बनना आसान नहीं

सिमरन ने दीक्षा लेकर कहा कि वैराग्य की राह आसान नहीं है। उनके अनुसार यह बहुत मुस्किल डगर है। उन्होंने कहा, ” मैं देशभर में घूमी और बहुत से खूबसूरत स्थानों पर गई। वहां वक्त भी बिताया, लेकिन सुकून नहीं मिला। जब मैं गुरुजनों के सानिध्य में आई तब जाकर सुकून की प्राप्ति हुई।”

सिमरन ने आगे कहा कि, “मुझे चकाचौंथ भरी यह लाइफ पसंद नहीं आई। यहां आवश्यकता से अधिक लोग इस्तेमाल करते हैं जो सही नहीं है। हमारे संत कम से कम संसाधन में जीवन व्यतीत करते हैं। हमारा मानना है कि आत्मा का परमात्मा से जुड़ना ही असली सुख है। मुझे साध्वी डॉ. मुक्ताश्रीजी से संयम की प्रेरणा मिली है।”

कैसी है सिमरन की फैमिली

बता दें कि सिमरन ने B.sc कम्प्यूटर साइंस से ग्रेजुएशन किया है। उनके घर में माता-पिता, एक बहन और दो भाई हैं। बहन मेडिकल की पढ़ाई कर रही है।

दीक्षा के बाद सिमरन के पिता अशोक गौड़ ने कहा कि, “हमारी तरफ से बेटियो को अपनी इच्छानुसार जीवन जीने की अनुमति है। हमने सोचा था कि पढ़ने-लिखने के बाद करियर बनाएंगे या शादी करेंगे लेकिन सिमरन की इच्छा दीक्षा लेने की ही थी।”

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