Loading...

दोस्त का दर्द नहीं हुआ बर्दाश्त तो 17 साल के लड़के ने 2500 रुपए के खर्च में बना दी कमाल की डिवाइस

0 414

दिल्ली के एक 17 साल के लड़के ने एक कमाल का आविष्कार कर दिया है। इस लड़के ने ऐसा काम कर दिखाया है कि इसको प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए भी चुना गया है।

जी हां, दरअसल माधव लवकारे नामक इस लड़के ने एक ऐसा स्मार्ट ग्लास बनाया है जो बधिरों यानि कि जो लोग सुन नहीं पाते उनके काम आता है।

एक और कमाल की बात ये है कि यह डिवाइस 132 भाषाओं को टैक्स्ट में बदलकर स्क्रीन पर डिस्पले करता है। चलिए जानते हैं माधव की पूरी कहानी।

ट्रांसक्राइब दिया है नाम

Loading...

दरअसल पूरी कहानी माधव के एक दोस्त से शुरू होती है जो सुन नहीं सकता था। दूसरे छात्रों से बातचीत में रोज समस्या आने के कारण उस दोस्त ने स्कूल आना छोड़ दिया।

ऐसे में माधव ने ट्रांसक्राइब नाम से एक स्मार्ट ग्लास बनाया जोकि उन लोगो के काम आएगा जो सुन नहीं सकते। दरअसल उनके लिए यह ग्लास बातों को टेक्स्ट के रूप में दिखाता है।

फिलहाल वही इस्तेमाल कर सकते हैं जो हैं पढ़े-लिखे

बता दें कि इस डिवाइस यानि ट्रांसक्राइब को नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इग्नाइट अवॉर्ड दिया जा चुका है।

बता दें कि फिलहाल ट्रांसक्राइब का इस्तेमाल पढ़े-लिखे लोग ही कर सकते हैं।

मालूम हो कि ट्रांसक्राइब बनाने पर उसे करीब 2,500 रुपए का खर्च आया।

बता दें कि नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने माधव के लिए ट्रांसक्राइब का पेटेंट कराया है। माधव का कहना है कि वह इससे मुनाफा नहीं कमाना चाहता। वह चाहता है इसे बनाने और आगे रिसर्च एंड डेवलपमेंट में आने वाला खर्च निकल जाए।

132 भाषाओं में आवाज को टेक्स्ट में बदल सकती है ये कमाल की डिवाइस

दरअसल माधव ने यह डिवाइस सस्ते माइक्रोचिप से बनाई है। इसे यूजर के स्मार्टफोन के साथ ब्लूटूथ के जरिए जोड़ा जाता है। बता दें कि इसमें गूगल के एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस यानि कि एपीआई के जरिए यह 132 भाषाओं में आवाज को टेक्स्ट में बदल सकता है।

मालूम हो कि यह डिवाइस किसी भी चश्मे के फ्रेम के साथ अटैच की जा सकती है, भले ही उसमें कोई भी पावर हो।

क्राउडफंडिंग से जुटा रहा है मदद

माधव के अनुसार वह अभी छोटा है तो निवेशकों के पास नहीं जा सकता। इसलिए क्राउडफंडिंग से मदद जुटा रहा है। एक क्राउडफंडिंग साइट की मदद से वह 3 लाख रुपए जुटाना चाहता था।

उसे 2.5 लाख रुपए मिले भी, साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट पर भी क्राउडफंडिंग के लिए प्रयास करना चाहता है। स्टैटिस्टा के अनुसार भारत में क्राउडफंडिंग इंडस्ट्री अभी सिर्फ 8 करोड़ रुपए की है।

6 साल की उम्र में बना चुका है सोलर ओवन

दरअसल माधव का जन्म कैलिफोर्निया में हुआ था। वहां माधव ने महज 6 साल की उम्र में बच्चों के लिए सोलर ओवन बना दिया था।

बता दें कि माधव जब 8 साल का था, तब उनकी फैमिली दिल्ली शिफ्ट हो गई थी।

इतना ही नहीं माधव ने 13 साल की उम्र में वॉइस कंट्रोल्ड होम ऑटोमेशन सिस्टम डेवलप कर दिया था। दरअसल उसने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि उसके पेरेंट्स हमेशा उसे लाइट-पंखों के बटन ऑफ करने के लिए कहते थे। ऐसे में माधव ने बिना बटन छुए लाइट ऑफ करने के लिए ये सिस्टम तैयार किया था।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.