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राजस्थान में किसान कर्जमाफी में 8 करोड़ का फर्जीवाड़ा, सहकारी बैंकों की होगी जांच

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राजस्थान में डूंगरपुर सहित कई जिलों में सहकारी समितियों से फर्जी लोगों को फसल ऋण दिए जाने और कर्जमाफी का फायदा लेने के कई मामले उजागर हुए हैं जिसने अब वहां की गहलोत सरकार की नींद उड़ा दी है.

जी हां, प्राप्त जानकारी के मुताबिक अब तक इस तरह के मामलों में 8 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. अब इस मामले में राजस्थान सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं.

इन मामले में डूंगरपुर के सभी सहकारी बैंकों के जांच होगी. जांच खंडीय अतिरिक्त रजिस्ट्रार के स्तर पर कार्रवाई की जाएगी. जिले में ऋणमाफी के दौरान हुई गड़बड़ी की जांच के लिए विभाग स्तर से 2-2 सहकारी ऑडिटरों की 20 टीमों का गठन किया जाएगा, जो 7 दिन में जांच कर रिपोर्ट रजिस्ट्रार को देंगे.

सूत्रों के मुताबिक अब डिजिटल मेंबर रजिस्टर के माध्यम से ही किसानों को भुगतान की व्यवस्था किया जाएगा, ताकि गड़बड़ी की संभावनाओं को पूरी तरह समाप्त किया जा सके.

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माना जा रहा है कि अब सभी जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में किसानों को फसली ऋण के भुगतान की सुचारू और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के लिए सभी कर्जदार किसानों के खातों का आधार संख्या से लिंक करवाया जायेगा.

वहीं दूसरी तरफ सहकारिता रजिस्ट्रार एवं कॉपरेटिव रजिस्ट्रार ने जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशक, अधिकारियों को बोला है कि सभी शाखाओं एवं पैक्स के निरीक्षण 31 मार्च तक हो जाएं ताकि किसी प्रकार की गबन की संभावना हो तो तुरंत जानकारी मिले और दोषी लोगों खिलाफ तत्काल कार्यवाही की जा सके.

इसी बीच सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि बैंक सदस्य किसानों को अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराएं ताकि किसानों के खेती-बाड़ी के कार्य प्रभावित न हों.

उधर ये भी जानकारी मिली है कि फसली ऋण लेने वाले किसानों के दुर्घटना बीमा के लंबित पड़े दावों के शीघ्र सुलझाने के लिए बीमा कम्पनी के प्रतिनिधियों के साथ राज्य स्तरीय समिति समीक्षा करेगी ताकि ऐसे बीमा क्लेम के दावों का निस्तारण हो सके और लोगो की मदद समय के अनुसार ही हो सके.

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