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सरकार अब करेगी गरीबी की परिभाषा में बदलाव, इन लोगों को नहीं मिलेगा सवर्ण आरक्षण का लाभ

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मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े जनरल केटेगरी के लोगों को यानी की सवर्णों को 10 % आरक्षण देकर लोकसभा चुनाव से पहले एक मास्टरस्ट्रोक चल दिया है। अब माना जा रहा है कि मोदी सरकार सवर्ण आरक्षण में शामिल 8 लाख रुपए की आय सीमा को बदलकर 5 लाख कर सकती है। और साथ ही 5 एकड़ संपत्ति को कम किया जा सकता है।

दरअसल इस मामले में केंद्रीय सामाजिक न्याय एंव अधिकारिता मंत्री थावरचंद्र गहलोत ने भी बदलावों की ओर इशारा किया है। दरअसल मंत्री जी ने कहा है कि 8 लाख सालाना आय और 5 एकड़ संपत्ति की लिमिट काफी ज्यादा है।

हालांकि गहलोत ने ये भी साफ़ किया है कि जब संसद से गरीब सवर्णों को आरक्षण देने का बिल पास हुआ तब उसमें कहीं भी आय सीमा और संपत्ति की सीमा का जिक्र नहीं किया गया है।

राज्यों को मिल सकता है सवर्ण आरक्षण का अधिकार

आपको बता दें कि वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार इस पर भी विचार कर रही है कि राज्यों को अपने हिसाब से सवर्ण आरक्षण के दायरे आने वालों के लिए नियम बनाने की छूट दे दी जाए। हालांकि अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।

इस बिल पर विपक्ष के हैं ये सवाल

बता दें कि विपक्ष की ओर से लगातार सवर्ण आरक्षण के दायरे के लिए जो आय लिमिट और संपत्ति तय की गई है, उस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

विपक्ष का इस मामले में कहना है कि जो लिमिट तय की है उसके दायरे में देश के सामान्य वर्ग के 95 % परिवार आएंगे। ऐसे में जो वाकई में गरीब हैं उनको फायदा नहीं मिलेगा।

इसके अलावा विपक्ष ने ये भी पूछा कि जब सरकार 2.5 लाख सलाना कमाने वाले से टैक्स लेती है, तो 8 लाख रुपए सालाना इनकम वाला गरीब बनकर आरक्षण का लाभ कैसे ले सकता है।

किनको होगा आरक्षण का फायदा

बता दें कि ऐसे सवर्ण परिवार जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपए से कम है उन्हें 10 % आरक्षण का फायदा मिलेगा। इसके साथ ही जिनके शहर में 1000 स्क्वेयर फीट से छोटा मकान है और 5 एकड़ से कम की कृषि भूमि है उन्हें भी आरक्षण का लाभ मिलेगा।

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