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मनमोहन सिंह जो 10 साल में नहीं कर पाए, उस काम को PM मोदी ने साढे चार साल में कर दिखाया

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मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने अपने दस साल के कार्यकाल में जनता तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने का काम यानी विज्ञापन पर करीब 5040 करोड़ रुपए खर्च किए। जबकि एनडीए के नेतृत्व वाली मोदी सरकार ने महज साढ़े चार साल के कार्यकाल में इससे कई गुना ज्यादा खर्च कर दी है। इस मामले में सूचना प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने सांसद में जानकारी दी।

संसद में पूछे गए सवाल पर दी जानकारी

दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के सांसद दिनेश त्रिवेदी ने संसद में एक सवाल पूछा था कि केंद्र सरकार ने मीडिया पब्लिसिटी पर अब तक कितनी धनराशि खर्च की है। इसके जवाब में राठौर ने कहा कि सबसे ज्यादा 2313 करोड़ रुपए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापन पर खर्च किए गए। वहीं 2282 करोड़ रुपए प्रिंट मीडिया में विज्ञापन के लिए खर्च हुए। इसी तरह 651 करोड़ रुपए आउटडोर पब्लिसिटी के लिए खर्च किए। राठौर से यह भी पूछा गया कि क्या सरकार ने योजनाओं के बारे में जागरुकता के प्रभाव को मापने के लिए कोई सर्वेक्षण किया गया है।

बीते साढ़े चार साल का हिसाब

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मंत्री द्वारा दी गई जानकारी में सामने आया की एनडीए सरकार ने प्रचार पर 2014-15 में 980 करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि 2015-16 में 1160 करोड़ रुपए और 2016-17 में 1264 करोड़ रुपए खर्च किए। बीते साढ़े चार साल में सबसे ज्यादा 1314 करोड़ रुपए 2017-18 में खर्च किए।

यूपी सरकार से दुगना किया खर्च

पब्लिक इनफॉर्मेशन पोर्टल फैक्टली के मुताबिक यूपीए सरकार ने दस साल के कार्यकाल में प्रचार पर करीब 5040 करोड़ रुपए खर्च किए। इससे साबित होता है कि यूपीए ने हर साल औसतन 504 करोड़ ही खर्च किए। जबकि एनडीए ने हर साल करीब 1202 करोड़ रुपए खर्च किए।

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