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मोदी सरकार ने किसानों को दिया न्यू ईयर गिफ्ट, समय पर चुकाया लोन तो माफ कर दिया जाएगा ब्याज

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तीन राज्यों में अपनी सरकार गंवाने के बाद मोदी सरकार किसानों को लेकर काफी सजग दिखाई दे रही है। इसलिए मोदी सरकार 2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले किसानों को आकर्षित करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही। इसी कड़ी में अब मोदी सरकार किसानों की कर्ज की समस्या को दूर करने के लिए एक नई योजना पर विचार कर रही है। ये योजना समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों का ब्याज माफ करने से संबंधित है।

सूत्रों के माने तो इस योजना से सरकार पर सालाना 15 हज़ार करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा है कि इसके अलावा खाद्य फसलों के वास्ते बीमा पॉलिसी पर प्रीमियम से पूरी तरह छूट देने का भी प्रस्ताव है। इसमें हॉर्टीकल्चर फसलों पर जो प्रीमियम लगता है उसको भी सरकार घटाए जाने के विचार में है।

ब्याज से छूट देने पर चल रहा है विचार-विमर्श

सूत्रों के अनुसार बीते दिनों में किसान मुद्दे को लेकर मीटिंग्स के कई दौर चले हैं। इन मीटिंग्स में किसान मुद्दे पर फिसलती बीजेपी ने कैसे इस मुद्दे पर किसानों का भरोसा जीता जाए इन विषयों पर संवाद किए हैं।

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ऐसी ही कई राउंड की मीटिंग के बाद उच्च स्तर पर बंपर उत्पादन के बीच कई फसलों पर किसानों की कम आमदनी को देखते हुए किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार ने एक योजना बनाई है।

वर्तमान में समय पर कर्ज चुकाने वालों को मिलता है 3% इंसेंटिव

जो लोग किसानों से जुड़े हैं उनको शायद ये बात पता हो की मौजूदा समय में किसानों को 7 % ब्याज दर पर 3 लाख रुपए तक शॉर्ट टर्म लोन मिलता है। इस लोन को समय से रिपेमेंट करने वाले किसानों को 3 % इंसेंटिव दिया जा जाता है।

अब सरकार इसी इंसेंटिव को बढ़ाकर किसानों का दिल जीतना चाहती है। इसीलिए किसानों को राहत देने के लिए एक निश्चित तारीख से पहले कर्ज लौटाने वाले किसानों को एग्री लोन पर 4 % ब्याज दर से छूट देने पर विचार किया जा रहा है।

11 लाख करोड़ का लक्ष्य

मालूम हो कि सरकार ने चालू वित्त वर्ष में किसानों को 11 लाख करोड़ रुपए का कर्ज देने का लक्ष्य रखा है। उधर बीते वित्त वर्ष की बात करें तो उस वित्त वर्ष में किसानों को 11.69लाख करोड़ रुपए का कर्ज दिया गया था।

15 हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ने की है आशंका

बता दें कि सरकार पर कृषि लोन के सामान्य मामलों में 2 % और समय से पेमेंट पर 5 % इंटरेस्ट सब्सिडी के बदले में सालाना 15 हज़ार करोड़ रुपए का बोझ पड़ता है।

सूत्रों के मुताबिक समय पर कृषि लोन चुकाने पर ब्याज पूरी यदि तरह माफ करने का फैसला लिया गया तो सरकार पर बोझ दोगुना बढ़कर 30 हज़ार करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।

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