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देश में पहली बार शुरू हुई ‛मेडिकल ड्रोन सेवा’, अब तेजी से पहुंचाई जा सकेगी मदद

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देश के मेडिकल क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति लाते हुए पुडुचेरी स्थित जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेज्युएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (JIPMER) ने देश में पहली बार मेडिकल ड्रोन सेवा को शुरू किया है। इस मेडिकल सेवा के शुरू हो जाने से देश में दुर्घटना स्थल पर कम समय में मदद पहुंचाएं जा सकेगी। अभी हमारे देश में दुर्घटना स्थल पर मदद पहुंचाने में काफी समय लगता हैं। इस सेवा से दुर्घटना स्थल पर मदद पहुंचाने, ICU में पेशेंट को देखने और कैजुअल्टी की स्थिति में लोगों के हालात का जायजा लिया जा सकेगा। जिपमेर का कहना है कि यह सेवा यूरोपीय देशों में लंबे अरसे से चल रही है, लेकिन भारत में यह अभी शुरुआती चरण में है।

ड्रोन से नहीं होगा इन्फेक्शन का खतरा
जिपमेर ने बताया कि इस ड्रोन सेवा के आ जाने से आईसीयू के भीतर और बाहर दोनों ही जगह नजर रखना आसान हो जाएगा। जिपमेर के मुताबिक नैनो ड्रोन को ICU में भर्ती मरीज को बाहर से देखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे इंफेक्शन का खतरा न हो। ऑपरेशन थिएटर में मौजूद लोगों को मॉनीटर करने के लिए नैनो ड्राेन काफी फासदेमंद साबित हो सकते हैं। आग लगने जैसी इमरजेंसी में जहां इंसान मदद नहीं पहुंचा सकते हैं, वहां ड्रोन जगह का जायजा ले सकेंगे और स्थिति का ब्यौरा दे सकेंगे।

नहीं पड़ेगी एयर एम्बुलेंस की जरूरत

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ऑपरेशन थिएटर के अंदर और बाहर निगरानी करनेके अलावा भी यह ड्रोन काफी मददगार साबित होंगे। बड़े साइज के ड्रोन को दुर्घटना या आपदा प्रभावित क्षेत्र में उड़ाया जा सकेगा और पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा सकेगी। इसके अलावा कई परिस्थितियों में मानव अंगों, सैंपल्स और दवाओं को भी तेजी से जरूरतमंद तक पहुंचाया जा सकेगा। इसके लिए एयर एंबुलेंस की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस ड्रोन को इंटरनेट के जरिए अॉपरेट किया जाएगा। Jipmer को यह इंटरनेट सेवा पुडुचेरी के National Knowledge Network (NKN) और National Informatics Centre (NIC) से मिलेगी।

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