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CGA के आंकड़ों के अनुसार, मोदी सरकार को 8 माह में हुआ 7.16 लाख करोड़ का घाटा

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जहां सरकार देश में अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए जीएसटी और नोटबंदी जैसे अलग-अलग तरीके अपना रही है वहीं देश का वित्तीय घाटा भी भी घाटा भी वित्तीय घाटा भी भी घाटा भी बढ़ता जा रहा है हाल ही में एक रिपोर्ट से सामने आया है कि केंद्र की मोदी सरकार आमदनी कम हो रही है और खर्च बढ़ता जा रहा है, जिस कारण सरकार का वित्तीय घाटा बढ़ता जा रहा है। जो कि सरकार के लिए काफी चिंता का विषय है। बृहस्पतिवार को सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में बताया गया कि अप्रैल से नवंबर 2018 तक सरकार को 7.16 लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ। जो पिछले साल के मुकाबले अधिक है।

क्या होता है वित्तीय घाटा

किसी भी देश के लिए वित्त घाट का काफी महत्व काफी महत्व रखता है इससे फिसकल डिफिसिट फिसकल डिफिसिट भी कहा जाता है। इसका सीधा सा मतलब है कि सरकार को एक तय समय में जितना राजस्व मिलता है, अगर सरकार उससे ज्यादा खर्च कर रही है तो ऐसी स्थिति को वित्तीय घाटा कहा जाता है।

कहां हुआ सरकार को घाटा

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दरअसल बृहस्पतिवार को कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से एक रिपोर्ट जारी करें जिसमें यह बताया गया कि अप्रैल से नवंबर 2018 तक सरकार को 8.7 लाख करोड़ रुपए का राजस्व मिला है। जबकि नवंबर 2018 तक सरकार 16.13 लाख करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। यानी कि सरकार को इन आठ महीनों में 7.16 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। सरकार का अनुमान है वित्त वर्ष यानी 31 मार्च 2018 तक सरकार को 17.25 लाख करोड़ रुपए का रेवेन्यू हासिल होगा।

अनुमान से अधिक हो रहा है घाटा

वैसे तो वित्तीय घाटा पहले भी सरकारों को होता रहा है लेकिन मोदी सरकार के लिए इसलिए ज्यादा महत्त्व रखता है क्योंकि सरकार ने जितने घाटे का अनुमान लगाया था सरकार को उससे कहीं गुना अधिक घाटा हो रहा है।

कितना लगाया था सरकार ने अनुमान

सरकार ने बजट 2018-19 में अनुमान लगाया था कि सरकार को पूरे वित्त वर्ष में 6.24 करोड़ रुपए का घाटा होगा, लेकिन नवबंर में ही यह 7.16 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इस हिसाब से माना जाए तो पूरे साल में सरकार को करीब 114. 8 फ़ीसदी अधिक घाटा हो चुका है.

पिछले साल के मुकाबले बढ़ा घाटा

पिछले साल भी सरकार का वित्तीय घाटा काफी था और नवंबर 2017 तक सरकार को पूरे साल के अनुमान के मुकाबले 112 फीसदी घाटा हुआ था, लेकिन इस साल तो यह उससे भी 2.8 फीसदी अधिक हो गया है।

घाटे की क्या है वजह

CGA की रिपोर्ट में वित्तीय घाटे का एकमात्र कारण रेवेन्यू कलेक्शन बताया है। दरअसल सरकार ने जितने राजस्व की उम्मीद जगाई थी सरकार को उससे काफी कम राजस्व इस साल प्राप्त हुआ है।

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