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देश में जल्द ही बनेंगे 14 कोस्टल इकोनामिक जोन, लगेंगी सैकड़ों फैक्टरियां, नौकरियों की आएगी बहार

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केंद्र सरकार ने देश के तटवर्ती इलाकों का विकास करने के लिए अपने सबसे बड़े प्रोजेक्ट सागरमाला के तहत देश में 14 बड़े कोस्टल इकोनामिक जोन बनाए जाएंगे इन इस्लामिक दोनों में बड़े पैमाने पर फैक्ट्री लगाई जाएंगी जिससे रोजगार के सैकड़ों अवसरों का सृजन होगा। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। साथ ही ये इंडस्ट्रियल जोन विकास से वंचित तटवर्ती इलाकों की प्रगति में भागीदार बनेंगे। इस मामले में नीति आयोग ने तटवर्ती इलाकों वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सलाह-मशविरा करके एक प्लान तैयार किया है। नीति आयोग ने देश में ऐसे 14 बड़े कोस्टल इकोनामिक दोनों का चुनाव भी कर लिया है जिन्हें सरकार विकसित करेगी।

बुनियादी सुविधाओं से किया जाएगा लैस

कोस्टल इकोनामिक जोन में बड़े पैमाने पर छोटी एवं बड़ी फैक्ट्रियां स्थापित की जाएंगी जिससे सैकड़ों की संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा इसके साथ ही यहां पर काम करने वाले लोगों के लिए एक आवासीय क्षेत्र भी बनाया जाएगा। इस ज़ोन को रेल, सड़क एवं अन्य यातायात माध्यम से भी जोड़ा जाएगा ताकि यहां तक पहुंचना आसान हो जाए। इसके साथ ही इन फैक्टरियों में बनने वाले प्रोडक्ट को भी बड़ी मात्रा में एक्सपोर्ट किया जाएगा जिसके लिए इन कोस्टल इकोनामिक जोनो को बंदरगाह के निकट ही स्थापित किया जाएगा। इलाकों में भारी मात्रा में स्कूल कॉलेजों का भी निर्माण किया जाएगा इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी बड़े पैमाने पर अस्पतालों का निर्माण किया जाएगा।

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कम कीमतों में कर सकेंगे एक्सपोर्ट

बता दें कि कोस्टल इकोनामिक जोन बनाने से वस्तुओं को कम कीमतों में एक्सपोर्ट किया जा सकेगा क्योंकि फैक्ट्रियों से बंदरगाह तक ले जाने की लागत कम हो जाएगी जिसकी वजह से हम कम दामों में अपने प्रोडक्ट को एक्सपोर्ट कर सकेंगे। बता दे कि चीन में इस तरह के कई सारे कोस्टल इकोनामिक जोन बनाए गए हैं बंदरगाह के निकट जिसकी मदद से वह अपने प्रोडक्ट को कम दामों में एक्सपोर्ट कर पाता है और इसीलिए विदेशियों में उसके प्रोडक्ट्स कम दामों में बिकते हैं।

मेक इन इंडिया को बल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लांच किए गए मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट को भी इस कोस्टल इकनोमिक जोन से कई सारे फायदे होंगे कोस्टल इकनोमिक जोन को विकसित करने के लिए अंतर मंत्रालय समिति का भी गठन किया गया है जिस ने इसपे रोड मैप और फ्रेमवर्क तैयार कर लिया है। जलमार्ग राज्य मंत्री राधा कृष्ण ने इस बारे में एक लिखित आधिकारिक जवाब पेश किया।

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