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बड़ी ही निर्दयी निकली मां, इस कड़ाके की ठंड को सहन नहीं कर पाया मासूम का शरीर, अस्पताल ले जाते वक्त

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वैसे तो अपने मासूमों के साथ हैवानियत की बहुत सारी कहानियां सुनी होंगी पर आज हम आपको एक ऐसी दर्दनाक कहानी बताने जा रहे हैं इसको सुनने के बाद शायद आपके मन में भी इस मासूम को लेकर दया आ जाए। सरकार द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ में अग्रणी रहे पाली जिले में एक बार फिर से शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। सोमवार सुबह जिले के नाडोल गांव से 5 किलोमीटर की दूरी पर एक महीने की बच्ची को कंबल में लपेट झाड़ियों में फेंक दिया। सुबह 11 बजे जब बच्ची के रोने की आवाज आई तो ग्रामीणों व पुलिस की मदद से उसे नाडोल जिला अस्पताल भर्ती कराया गया, जहां से उसे पाली के लिए रेफर किया गया। पाली में बांगड़ अस्पताल लाते ही उसकी रास्ते में मौत हो गई।

अभी तक बच्ची के निर्दयी माता-पिता के बारे में कोई भी जानकारी नहीं मिल पाई है। सूत्रों के अनुसार, नाडोल-रानी सड़क मार्ग स्थित वरकाणा प्याऊ के पास सोमवार सुबह 11 बजे झाड़ियों से एक बच्ची के रोने की आवाज आने पर ग्रामीण वह एकत्रित हो गए थे। इस बात कि सूचना नाडोल पुलिस चौकी में दी गई। सूचना मिलने पर थानाधिकारी चंदन सिंह भाटी मौके पर पहुंचे और उसे नाडोल अस्पताल ले गए। यहां डॉ. वागाराम पटेल ने बच्ची को भर्ती कर उसका इलाज शुरू किया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं होता देख उसे पाली के बांगड़ अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल पहुंचने के थोड़ी देर बाद ही मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों की माने तो बच्ची का पूरा शरीर ठंडा पड़ा हुआ था और संभावना है कि ठंड की वजह से ही उसकी मौत हो गई।

कड़ाके की ठंड में माता-पिता बच्ची को मात्र एक टी-शर्ट और बेबी पेंट में ही छोड़ गए थे झाड़ियों के बीच। हैवानियत की सारी हदें पार कर दी कि मां-बाप ने इतनी कड़ाके की ठंड में ना तो उसके शरीर पर एक भी शटर ना कोई अन्य गरम कपड़ा।

बच्ची को जैसे ही बांगड़ अस्पताल लाया गया उसने एक जोरदार उल्टी करी जिसके बाद ही उसकी मौत हो गई। तुरंत शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आर. के विश्नोई को बुलाया गया, लेकिन जब तक ने बच्ची दम तोड़ था। डॉ. विश्नोई ने बताया कि बच्ची का शरीर पूरी तरह से ठंडा पड़ गया था। ऐसा लग रहा था जैसे बच्ची काफी समय से किसी ठंडे स्थान पर रही हो। हालांकि उन्हाेंने यह संभावना जताई है कि हो सकता है ठंड की वजह से हार्ट व श्वास नलिका पर इसका असर हुआ और उसकी मौत हो गई हो। ऐसा माना जा रहा है कि शरीर में खून जम गया होगा।हालांकि यह तय है कि बच्ची कोल्ड स्ट्रेस की चपेट में थी, यानि उसके शरीर का तापमान 34 डिग्री सेंटीग्रेड से नीचे था, जो उसकी मौत का प्रमुख कारण है।

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डॉक्टरों का कहना है कि एक से तीन साल तक के बच्चों का शरीर ठंड को सहन करने लायक नहीं होता है। ऐसे बच्चों को कम से कम 25 से 28 डिग्री का तापमान चाहिए होता है। अन्यथा वे बीमार हो सकते हैं। रात भर जंगल में 6 डिग्री सेल्सियस में पड़े रहने के कारण हो सकता है कि बच्ची के शरीर में खून जम गया हो जिसके कारण उसका दिल थम गया और इसी कारण उसकी मौत हो गई।

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