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मेरठ, अलवर और पानीपत तक का सफर अब मिनटों में हो जाएगा पूरा, क्योंकि आ रही है रैपिड रेल

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अब बहुत जल्द ही दिल्ली एनसीआर और आसपास के इलाकों में रैपिड रेल आपको दौड़ती हुई नजर आ सकती है।

दरअसल रैपिड रेल के चलने पर अब सरकार ने हरी झंडी दे दी है और जल्द ही रैपिड रेल दिल्ली एनसीआर और आसपास और आसपास के लोगों को एक दूसरे से जोड़ने लिए उपलब्ध होगी।

दिल्ली-एनसीआर में लोगों को सुविधाएं देने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की परियोजनाओं में रैपिड रेल भी प्रमुख है।

बता दें कि दिल्ली के सराय कालेखां से उत्तर प्रदेश के मेरठ, राजस्थान के अलवर और हरियाणा के पानीपत के लिए रैपिड रेल चलाने की योजना पर काम चल रहा है। वहीं दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल के लिए काम शुरू भी हो गया है।

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सबसे अच्छी बात रैपिड रेल की ये होगी की रैपिड रेल के शुरू हो जाने के बाद इन शहरों की यात्रा मिनटों में पूरी हो जाएगी। अभी यात्री घंटों की मशक्कत करने के बाद इस स्थानों तक पहुंच पाते हैं।

सबसे बड़ा जंक्शन बनेगा सराय कालेखां

बता दें कि दिल्ली-एनसीआर को रैपिड रेल से जोड़ने के लिए दिल्ली के सराय कालेखां को जंक्शन बनाए जाने की योजना है।

मालूम हो कि यहीं से मेरठ, पानीपत और अलवर के लिए रैपिड रेल मिलेगी। इसको देखते हुए सराय कालेखां जंक्शन को बनाए जाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। और इसको लेकर तैयारियां जोरों शोरो से चल रही हैं।

चूंकि मेरठ, अलवर और पानीपत के लिए यहीं से रैपिड रेल मिलेगी इसलिए जाहिर है कि यहां पर अधिक भीड़ होगी। यही कारण है कि इसे जंक्शन बनाने की योजना है।

यात्रियों के लिए होंगे अलग-अलग प्लेफॉर्म

एक रिपोर्ट की माने तो सराय कालेखां जंक्शन पर रैपिड रेल में उतरने और चढ़ने के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म बनाए जा सकते हैं।

दरअसल दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल तैयार करने वाली कंपनी एनसीआरटीसी के एक अधिकारी के अनुसार सराय कालेखां जंक्शन को इस प्रकार से बनाया जा रहा है कि यात्री उतरते या चढ़ते समय आपस में न टकराएं। इसी संबंध में यहां पर आठ प्लेटफॉर्म तक बनाए जा सकते हैं।

अधिकारी के अनुसार ऐसा अगर होता है तो प्लेटफॉर्म को एक अलग पहचान दी जाएगी। यानि जिन प्लेटफॉर्म से यात्री रेल में सवार होंगे वह ग्रीन और जिन पर यात्री रेल से उतरेंगे उन्हें रेड या पिंक कलर दिया जा सकता है।

एलिवेटेड स्टेशन बनाने की है योजना

एक रिपोर्ट के मुताबिक सराय कालेखां जंक्शन को एलिवेटेड स्टेशन बनाया जा सकता है। जी हां, और बता दें कि इस एलिवेटेड स्टेशन बनाने में लागत में कमी आएगी जबकि अंडरग्राउंड स्टेशन बनाने से लागत बढ़ सकती है। इसलिए भी ऐसा कदम उठाया जा सकता है।

एक और कारण इस स्टेशन को एलिवेटेड स्टेशन बनाने का है वो ये है कि अगर ये एलिवेटड स्टेशन बन जाता है तो इसके कारण इसको अंतरराज्यीय बस अड्डा लोकल बस अड्डा और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन को फुट ओवरब्रिज से आसानी से जोड़ा जा सकता है।

दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल का काम हो गया है प्रारंभ

जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली-मेरठ के बीच बनने वाली रैपिड रेल का काम शुरू हो चुका है। लेकिन इसको अभी तक फाइनल मंजूरी नहीं मिल पाई है। दरअसल अभी तक दिल्ली सरकार ने भी इस रैपिड रेल सेवा को मंजूरी नहीं दी है।

बता दें कि इस रैपिड रेल का निर्माण होने के बाद दिल्ली से मेरठ की दूरी करीब 40 मिनट में तय हो जाएगी। अभी दिल्ली से मेरठ जाने में करीब डेढ़ घंटा लग जाता है। यानि कि यात्रियों का समय भी बचेगा और सुविधाएं जो मिलेंगी वो अलग।

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