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किसानों की तरह अब ये भी चाहते हैं माफ हो कर्ज, कर्जमाफी के लिए करेंगे देशव्यापी आंदोलन

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हाल ही में आपने देखा होगा कि बीजेपी सहित अन्य राजनीतिक दलों ने की चुनाव में कर्ज माफी की घोषणा। कांग्रेस ने 3 राज्यों में चुनाव जीतने के बाद सबसे पहले इन तीनों राज्यों के किसानों का कर्ज माफ किया। इसके पहले केंद्र की मोदी सरकार भी कर चुकी है कई बड़े उद्योगपति और कॉर्पोरेट सेक्टर के लोगों का कई करोड़ माफ। इन सभी कर्ज माफी पर देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन काटने नाराजगी जताते हुए इसे देश के करदाताओं के साथ छलावा बताया है।

व्यापारिक संगठन ने वर्तमान हालात में देश के 7 करोड़ व्यापारियों जिन्होंने बैंकों से कर्ज लिया हुआ है उनका भी कर्जा माफ करने व उन्हें भी सुविधाएं देने की मांग की है। कैट ने इस मुद्दे पर एक बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। इस सम्बन्ध में व्यापक विचार करने और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए कैट ने अपनी राष्ट्रीय गवर्निंग कॉउन्सिल की एक मीटिंग आने वाली 12 -13 जनवरी को भोपाल में बुलाई है जिसमें देश के सभी राज्यों के बड़े व्यापारी नेता भाग लेने पहुचेंगे।

राजनीतिक दल वोट के लिए करते हैं कर्ज माफी
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने सोमवार को कहा कि वोटों के लिए राजनीतिक दल कर्जमाफी करते हैं। संविधान ने किसी भी सरकार को यह अधिकार नहीं है कि वह अपनी मनमर्जी से देश के कोष से किसी की भी कर्ज माफी कर बैंकों पर इसका बोझ डाले और पूरी बैंकिंग प्रणाली को तहस-नहस कर दे। इन कर्जो की वजह से देश का एनपीए बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा की कर्ज माफ़ी से देश आर्थिक विषमता का शिकार होता है और सरकार नीतिगत रूप से लाचार बन जाती है। देश के करोड़ों करदाता देश के विकास की आशा में टैक्स देते हैं न की मनमर्जी से वोटों का कारोबार करने के लिए कोई सरकार लुभावनी कर्ज माफी करे।

राजनीतिक दल अपने पैसे से करें कर्ज माफी
खंडेलवाल ने यह भी कहा कि यदि कोई भी सरकार चाहती है कि वह लोग का कर्ज माफ करें तो वह अपने राजनीतिक दल के खाते से माफ करना कि जनता की गाढ़ी कमाई को इस तरह लूट आए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को लोगों को सक्षम बनाने की ओर ध्यान देना चाहिए ना कि कर्ज माफी की ओर। खंडेलवाल ने कहा कि देश में 7 करोड़ छोटे व्यावसायी प्रति वर्ष लगभग 42 लाख करोड़ रुपये का व्यापार करते हैं जिसमें से केवल 4 प्रतिशत को ही बैंकों से कर्जा मिलता है। बाकी व्यापारी ऊँची ब्याज दरों पर अन्य साधनों से कर्जा लेते हैं। इस पर अब रोक लगनी जरूरी है और व्यापारियों को आर्थिक पैकेज मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कैट देश के सभी राज्यों में इस मुद्दे पर एक बढ़ा आंदोलन चलाएगा।

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