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इस सेक्टर के कर्मचारियों के लिए आई ख़ुशख़बरी, न्यूनतम मजदूरी का आया ये नियम, हर 5 साल में होगा रिवाइज

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कर्मचारियों के लिए एक खुशखबरी आई है। जी हां, दरअसल केंद्रीय श्रम मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्टैंडिंग कमेटी ने सभी सेक्टर के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मजदूरी (मिनिमम वेज) लागू करने की सिफारिश की है।

बता दें कि चाहे वह सेक्टर सरकार की तरफ से मान्यता प्राप्त हो या नहीं। संगठित हो या असंगठित, सभी सेक्टर के लिए मिनिमम वेज लागू होंगे। यानि की सबका फायदा होगा इसमें।

मालूम हो कि न्यूनतम मजदूरी नहीं देने वाले एम्प्लॉयर्स को 10 लाख रुपए बतौर जुर्माना देना पड़ सकता है। साथ ही ये भी साफ़ कर दिया गया है किसी भी सेक्टर के कर्मचारियों से 8 घंटे से अधिक समय तक काम नहीं लिया जा सकेगा।

इसके अलावा अर्जेंट वर्क के नाम पर भी कर्मचारियों को नहीं रोका जा सकेगा। अनुभवी एवं फ्रेशर्स दोनों के लिए समान वेज नहीं होंगे। हालांकि अनुभव को महत्व दिया जाएगा।

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5 साल में रिवाइज होगा

एक और अच्छी बात ये है कि हर पांच साल पर इस मिनिमम वेज को रिवाइज किया जाएगा। वहीं एक नेशनल मिनिमम वेज भी होगा ऐसा इसलिए क्योंकि इसीके आधार पर सभी राज्य अपने-अपने राज्य के लिए मिनिमम वेज फिक्स करेंगे।

मालूम हो की इस संबंध में संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट लोक सभा में सौंप दी है। बता दें कि किसी भी कानून को अंतिम रूप देने में स्टैंडिंग कमेटी की सिफारिश को काफी महत्व दिया जाता है। स्टैंडिंग कमेटी को मिनी पार्लियामेंट के रूप में भी जाना जाता है।

कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक मिनिमम वेज के लागू होने से देश भर में काम कर रहे लगभग 48 करोड़ लोगों को फायदा होगा। कमेटी के मुताबिक इन 48 करोड़ कामगारों में से 82.7 % लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं।

बोनस नहीं शामिल होगा मिनिमम वेज में

स्टैंडिंग कमेटी ने श्रम मंत्रालय को यह भी कहा है कि बोनस न्यूनतम मजदूरी का पार्ट नहीं हो सकता है और उसे इससे बाहर रखा जाना चाहिए।

कमेटी के मुताबिक ओवरटाइम भत्ता, ट्रैवलिंग भत्ता, पीएफ, ग्रेच्यूटी व पेंशन के मद में दी गई राशि को मिनिमम वेज का पार्ट नहीं माना जाएगा।

नेशनल मिनिमम वेज का हो प्रावधान

स्टैंडिंग कमेटी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को एक नेशनल मिनिमम वेज फिक्स करना चाहिए हालाँकि इसे करने से पहले राज्य सरकार की भी सलाह जरूरी है।

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अधिकतर एम्प्लायर ईएसआई, पीएफ जैसी चीजों के नाम पर कर्मचारियों की सैलरी से पैसा काट लेते हैं जो उचित नहीं है।

मिनिमम वेज नहीं देने पर श्रम मंत्रालय ने अपने प्रस्तावित कानून में 50 हज़ार रुपए के जुर्माने का प्रावधान रखा था। लेकिन इस पर कमेटी ने अपनी सिफारिश में कहा है कि 50 हज़ार रुपये का जुर्माना बेहद ही कम है इसलिए इसको बढ़ाकर 10 लाख तक किया जाना चाहिए।

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