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महिला की प्रेग्नेंसी जांच के दौरान, डॉक्टरों को स्क्रीन पर नजर आया कुछ ऐसा ही उड़ गए होश, बच्ची..

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इंग्लैंड में हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद सालभर की एक बच्ची अपने घर सही सलामत पहुंच चुकी है। सालभर पहले जब इस बच्ची का जन्म हुआ था तो उसका वजन बेहद कम और दिल शरीर से बाहर की ओर था। उसकी हालत देखने के बाद डॉक्टर्स ने बता दिया था कि उसकी जीने की उम्मीद बहुत कम है। हालांकि इसके बाद भी डॉक्टर्स उसे बचाने में कामयाब हो गए। डिलीवरी से पहले जब डॉक्टर्स ने महिला का स्कैन किया था तो वे गर्भ में मौजूद बच्ची को अपने दिल के साथ खेलते देख हैरान रह गए थे। ब्रिटेन में इस समस्या के साथ पैदा होने के बाद जिंदा बच जाने वाली ये इस तरह की पहली बच्ची है।

इंग्लैंड के लीसेस्टर में रहने वाली एक कपल नाओमी फिंडले और डीन विल्किन्स के घर पिछले साल बेटी ने जन्म लिया। जिसका नाम उन्होंने वेनेलोप रखा। उसके जन्म को लेकर वे काफी उत्साहित थे।

उनकी खुशी उस वक्त तनाव में बदल गई जब डॉक्टर्स ने उन्हें बताया कि उनकी बेटी का दिल शरीर के बाहर की ओर है, और उसके जीने की संभावना बहुत कम है। डॉक्टर्स ने यही बात बच्ची के जन्म से पहले उसकी मां के स्कैन को देखकर भी कही थी। जिसमें गर्भस्थ बच्ची अपने दिल के साथ खेलती दिखी थी।
जन्म के वक्त ही वेनेलोप बेहद ही कमजोर थी, और उसका वजन करीब 1.5 किलोग्राम ही था। भले ही बच्ची की हालत बेहद खराब रही हो, लेकिन इसके बाद भी 50 डॉक्टर्स की एक टीम उसे बचाने की कोशिश करती रही।

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डॉक्टर्स के मुताबिक ‘एक्टोपिया कॉर्डिस’ नामक बीमारी की वजह से बच्ची का दिल शरीर के बाहर था। जिसके बाद जन्म के पहले तीन हफ्तों में ही उसे तीन-तीन ऑपरेशन्स से गुजरना पड़ा।

बच्ची के शरीर में दिल के लिए जगह बनाने के लिए पहले उसके सीने को चीरकर वहां जगह बनाई गई, फिर अगले दो हफ्तों में दिल स्वतः ही वहां जाकर बैठ गया। शरीर में दिल को बैठाने के बाद उसके ऊपर एक रक्षात्मक ढाल बना दी गई और फिर खाली जगह को त्वचा के जरिए पैक कर दिया गया।

बच्ची की मां नाओमी ने बताया कि इस साल बच्ची ने बेहद खराब दौर देखा। उसकी जान कई बार खतरे में पड़ गई थी, हालांकि इसके बाद भी वो मौत के मुंह से वापस आ गई। ये बच्ची इतनी खास है कि मेडिकल विश्वकोष में अब उसके नाम का एक अलग पेज भी है।

सालभर तक चले इलाज के बाद अब बच्ची की हालत खतरे से बाहर आ चुकी है और उसका वजन भी अब 8 किलो से ज्यादा हो चुका है। हालांकि जीने के लिए उसे ऑक्सीजन और ढेर सारी दवाईयों की जरूरत अभी भी पड़ती है।

बच्ची की हालत में सुधार के बाद डॉक्टर्स ने उसे घर भेजने की इजाजत दे दी है। बेटी के घर आने से उसके पेरेंट्स बेहद खुश हैं, और इसे वे अपने लिए सबसे बड़ा क्रिसमस गिफ्ट मान रहे हैं। उनकी नजर में बेटी का बचना किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं है। हालांकि बच्ची चार दिन अब भी अपने घर में और बाकी तीन दिन हॉस्पिटल में ही रहती है।

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