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खुशखबरी: साल 2019 में मिलेगी 10 लाख लोगों को नौकरी, 8-10% तक बढ़ेगी सैलरी

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एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल वेतन में करीब आठ-दस % की औसत वृद्धि हुई. वहीं दूसरी ओर अगर आने वाले साल की बात करें तो विशेषज्ञों को लगता है कि नए वर्ष यानी 2019 में करीब 10 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावनाएं रहेंगी.

हालांकि वेतनवृद्धि पर एक्सपर्ट्स का मानना है कि वो पिछले साल की तरह ही बनी रह सकती है. लेकिन कुछ खास क्षेत्र के लोगों की वेतन में अधिक बढ़ोतरी भी देखने को मिल सकती है.

चुनाव से पहले सतर्क रहेंगे नियोक्ता

अगले साल आम चुनाव होने वाले हैं ऐसे में अटकलों का बाजार भी गर्म है और सातग ही ये कयास भी लगाए जा रहे हैं कि राजनीतिक अनिश्चितता पहली छमाही तक बनी रह सकती है. ऐसे में नियोक्ता काफी सतर्क रहेंगे.

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दरअसल रोजगार सृजन हाल के समय में बहस का एक बड़ा एवं अहम मुद्दा रहा है. ऐसा इसलिए है क्योंकि तेज व्यापक आर्थिक वृद्धि के बावजूद रोजगार सृजन की गति उस हिसाब से नहीं रही है.

रोजगार बाजार आ रहा है सही पटरी पर

विशेषज्ञों की माने तो देश में रोजगार सृजन को लेकर पर्याप्त और विश्वसनीय आंकड़ों का अच्छा खासा अभाव है. ऐसे में इस आभाव के कारण भी स्थिति ज्यादा बदतर हो गयी है.

हालांकि रोजगार बाजार में थोड़ी तेज़ी आई है और ऐसा माना जा रहा है की इसके पीछे दो बड़ी वजह रही है।

एक तो साल 2016 के नवंबर में लगाई गई नोटबंदी और दूसरा जुलाई 2017 में लागू किया गया जीएसटी इन दोनों के बाद ही वर्ष 2018 में भारतीय रोजगार बाजार फिर से पटरी पर लौटता नजर आया है.

पहली तिमाही तक करना होगा इंतज़ार

सोसायटी फॉर ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट यानि की एसएचआरएम के परामर्श विभाग के प्रमुख निशिथ उपाध्याय ने अपने विचार इस विषय में प्रस्तुत किए है।

उनके मुताबिक, “यह विडंबना है कि आम चुनाव के दौरान रोजगार सृजन एक बड़ा मुद्दा रहने वाला है, इसके बावजूद संगठन 2019 में अपनी कारोबारी योजना को लागू करने को लेकर सतर्कता का रुख अपना सकते हैं. इससे कम-से-कम साल की पहली तिमाही में रोजगार सृजन प्रभावित होगा.”

अटकलों का बाजार गर्म, हो सकता है बड़ा निवेश

मानव संसाधन सेवा प्रदान करने वाली रैंडस्टैड इंडिया के प्रमुख पॉल ड्यूपुइस ने भी अपने विचार इस संबंध में रखे हैं. उन्होंने कहा कि सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में दो साल बाद नियुक्तियों में उत्साह का माहौल रहेगा.

इस साल बुनियादी ढांचा क्षेत्र, विनिर्माण, खुदरा और एफएमसीजी क्षेत्र में स्थिति बेहतर हुई है. हालांकि ये कहना गलत नहीं होगा कि बैंकिंग, वित्तीय सेवा और दूरसंचार क्षेत्र में नौकरियों की स्थिति पहले से काफी खराब भी हुई है.

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