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मकान खरीदने वालों के आए अच्छे दिन, मोदी सरकार अब देने जा रही है ये छूट

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28 से भी ज्यादा वस्तुओं पर जीएसटी में भारी छूट देने के बाद अब मोदी सरकार कर रही है आप को एक और छूट देने की तैयारी जी हां यह छूट मकान बनाने को लेकर है जिसमें की सरकार अभी तक लगने वाले जीएसटी कर की दरें कम करने जा रही है। तो आइए जानते हैं कि किस तरह आपको मिलेगी मकान बनाने पर छूट।

वस्‍तु एवं सेवा परिषद मकान पर लगने वाले 12 प्रतिशत जीएसटी को घटाकर मात्र 5 प्रतिशत कर सकती है। इस तरह से उपभोक्‍ताओं को 7 प्रतिशत तक की छूट मिल सकेगी। वस्‍तु एवं सेवा (GST) परिषद 23 वस्‍तुओं पर जीएसटी की दरें कम करने के बाद अब आम जनमानस के सपने को पूरा करने की तैयारी में है। अगले महीने होने वाली बैठक में ऐसे मकानों पर जीएसटी दरे घटाने की तैयारी हो रही है जो या तो बन रहे हैं और या फिर कंप्‍लीशन (निर्माण कार्य सम्‍पन्‍न होने का प्रमाण पत्र)होने जा इंतजार कर रहे हैं। खुफिया तंत्र से मिली जानकारी के मुताबिक वस्‍तु एवं सेवा परिषद मकान पर लगने वाले 12 प्रतिशत जीएसटी को घटाकर मात्र 5 प्रतिशत करने पर विचार कर सकती है। इस तरह से उपभोक्‍ताओं को 7 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है।

बताया जाता है कि 80 प्रतिशत निर्माण सामग्री पंजीकृत डीलरों से खरीदने वाले बिल्‍डरों को अलग-अलग मदों पर कर में भारी छूट दी जाती है। ऐसे बिल्‍डरों के लिए जीएसटी की दर घटाकर पांच प्रतिशत तक करने का प्रस्‍ताव विचार के लिए भेजा गया है। इसी के साथ परिषद को यह भी बताया गया है कि बिल्‍डर निर्माण में इस्‍तेमाल हो रही वस्‍तुओं के लिए नकदी में भुगतान कर रहे हैं, जिसके कारण उपभोक्‍ताओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। फ्लैट और घर के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश निर्माण सामान और सेवाओं पर 18 प्रतिशत जीएसटी अभी तक लगता है जबकि सीमेंट पर 28 प्रतिशत तक का जीएसटी लगता है।

गौरतलब है कि मई, 2017 से लागू हुए रेरा कानून तथा जीएसटी क्रियान्वयन की वजह से भी पिछले साल घरों की बिक्री काफी घट गई थी। रियल्टी पोर्टल ने कहा कि 2018 में नए घरों की आपूर्ति इससे पिछले साल की तुलना में 22 प्रतिशत तक घटकर 1.9 लाख यूनिट्स पर आ गई है। नए रियल एस्टेट कानून रेरा के प्रावधानों का कड़ाई से पालन की वजह से बिल्डरों ने नई परियोजनाएं शुरू करने में कई सारी सावधानियां बरती है। इसके अलावा नकदी की कमी तथा पहले से बने मकान नहीं बिकने की वजह से नई परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही थी जिसकी वजह से बिल्डरों को काफी नुकसान हो रहा था।

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