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ट्रैन के टॉयलेट में ही महिला ने दे दिया बच्चे को जन्म, फिर उसी मां ने नवजात को चुन्नी में लपेट ठूंस दिया फ्लश में

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अपने भ्रूण हत्या के बहुत सारे मामले सुने होंगे जिनमें की मां बाप बच्चों को पैदा करने के बाद उसी हालत में छोड़ देते हैं अधिकतर ऐसे मामले लड़कियों के केस में ज्यादा होते हैं मगर इस बार एक अजीब गरीब घटना सामने आई है। मां की ममता पर ही सवाल खड़े कर दिए।

हावड़ा-अमृतसर मेल में शुक्रवार रात बच्चे को जन्म देने के बाद उसकी मां ने ट्रेन के टॉयलेट में उसके गले में चुन्नी का फंदा लगाकर उसे फ्लश में ठूंस दिया। बच्चा पूरी तरह मेच्योर होने के बाद ही पैदा हुआ था। हेल्दी होने के कारण फ्लश करने के बाद भी ट्रेन से नीचे नहीं गिरा और फ्लश पाइप में ही करीब 12 घंटे तक फंसा रहा। इसके बाद शनिवार दोपहर को सफाईकर्मियों ने देखा तो नवजात को निकालकर तुरंत अस्पताल पहुंचा गया और उसके लिए गर्म कपड़ाें की व्यवस्था भी की। पुलिस को जानकारी दे गई है। अभी तक बच्चे की मां का पता नहीं चल पाया है। वहीं, नवजात की जिंदगी बचाने वाले हीरो का कहना हैं कि अगर बच्चे को कोई पालने वाला न मिले तो प्रशासन उन्हें बच्चा सौंप दे उसे हम अपने बच्चे जैसा लाड प्यार देंगे।

‘जाको राखे साइयां मार सके न कोय’ की कहावत हावड़ा मेल के एसी बी-3 कोच के टॉयलेट के फ्लश में मिले नवजात पर बिलकुल सटीक बैठती है। दोपहर पौने दो बजे के करीब ट्रेन अमृतसर रेलवे स्टेशन पर पहुंची। ट्रेन खाली होने के बाद सफाई प्रक्रिया शुरू की जाती हैं।

मैं बोगियों को चेक करते हुए एसी कोच बी-3 में पहुंचा और फ्लश का निरीक्षण करने के लिए वाशरूम का दरवाजा खोला ही था कि तभी मैंने देखा कि फ्लश में कोई चीज फंसी हुई है। पास जाकर देखा तो एक बच्चा था। उसके गले में चुन्नी का फंदा लगा हुआ था। साबी ने तत्काल अपने साथियों भरत कुमार और सन्नी को आवाज लगाई। इसके बाद हमने बच्चे को सावधानी से निकाला। देखा तो सांसें चल रही थीं, लेकिन ठंड से उसकी स्थिति काफी खराब हो चुकी थी। इसके बाद हमने बिना किसी देरी के उसे तुरंत जलियांवाला बाग मेमोरियल सिविल अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में तैनात डॉक्टरों और स्टाफ ने भी बिना देरी किए इलाज करना शुरू कर दिया। इसके साथ ही सभी ने मिल कर बच्चे के लिए गर्म कपड़े की व्यवस्था भी की। जैसा कि सफाई इंचार्ज गुरदेव सिंह साबी ने बताया।

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डॉक्टरों के मुताबिक बच्चा अपने समय पर पैदा हुआ है और हेल्दी है। लेकिन सर्दी लगने से उसकी स्थिति नाजुक हो गई थी। फिलहाल इलाज के बाद वह सामान्य हो गया है। इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया और उसने मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी। संभवतया महिला ने बच्चे को डिलीवरी के बाद मारने की नीयत से ही फ्लश में फंसाया था, लेकिन होल पतला होने से बच्चा नीचे नहीं गिर सका। इसकी उम्र से अंदाज़ा लगाया जा सकता है की ये आधी रात के आसपास पैदा हुआ होगा।

बच्चा अब पूरी तरह से स्वास्थ है और डाक्टरों की निगरानी में है। लेकिन उसे अब पालेगा कौन? जी हां यह सवाल काफी परेशान करने वाला है। जहां अस्पताल और पुलिस नवजात को पंघूड़ा भेजने की कवायद कर रहा है। वहीं दूसरी ओर बच्चे को ट्रेन के फ्लश से निकालकर अस्पताल लाकर जान बचाने वाले इंचार्ज गुरदेव सिंह साबी और उनके साथियों ने कहा कि अगर प्रशासन की इजाजत हो तो हम सब खुद अपने बच्चे की तरह से उसकी परवरिश करने को तैयार हैं। कोई अगर बच्चे को न ले तो हमें ही दे दो।

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