Loading...

सांस नहीं ले पा रहा था मरीज तो डॉक्टर ने ऑक्सीजन निकालकर भेज दिया घर, कहा- इसे यहां रखेंगे तो

0 16

आपने इससे पहले कई बार सुना होगा कि बिना पैसे के इलाज ना मिलने पर अस्पताल में मरीज को बाहर कर दिया। लेकिन हम आज आपको एक ऐसा मामला बताने जा रहे हैं। जिसको सुनने के बाद आपका अस्पतालों से भरोसा ही उठ जाएगा।

सिविल अस्पताल में सांस नहीं ले पा रहे एक मरीज को ऑक्सीजन निकालकर डॉक्टरों ने घर भेज दिया और कहा कि यह टीबी वार्ड है, इसे यहां रखा तो परिजनों को भी हो जाएगी। मरीज को पहले ओपीडी में दवा देकर चलता कर दिया गया था। उसे लकवा है, सांस लेने में भी दिक्कत आ रही थी तो परिजन सीएमओ के पास गए। सीएमओ ने उसे टीबी चेस्ट वार्ड में एडमिट कर दिया, लेकिन वहां से रेजिडेंट डॉक्टर ने बिना असिस्टेंट प्रोफेसर की अनुमति के एक घंटे बाद ही उसे डिस्चार्ज कर दिया और परिजनों से बोले- इसे पैरालाइज्ड है, यहां इलाज नहीं होगा। डिस्चार्ज के बाद मरीज की हालत नाजुक है।

क्या है पूरा मामला

लिंबायत के गोपालनगर निवासी 35 वर्षीय अवधेश कुमार सोनी जुलाई में कंपनी में काम करते समय अचनाक गिर गए थे। उनके गले के पिछले हिस्से पर काफी गंभीर चोट आई थी। इलाज भी चल रहा था, लेकिन कुछ दिन पहले उन्हें लकवा मार गया। सिविल अस्पताल में ऑपरेशन भी कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। गुरुवार को सांस लेने में दिक्कत हुई तो परिजन उन्हें दोपहर करीब तीन बजे सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में ले आए। उन्हें टीबी चेस्ट की ओपीडी में भेज दिया गया। शाम पांच बजे रेजिडेंट डॉक्टर मित्तल कोठारी ने मरीज को दवा देकर घर जाने को कहा। दिक्कत बढ़ी तो शाम 7 बजे सीएमओ डॉ. घीया ने मरीज टीबी चेस्ट वार्ड में भर्ती करा दिया था।

Loading...

अवधेश के पिता, पत्नी और दो बच्चियां उन्हें स्ट्रेचर सहित ट्रॉमा सेंटर में ले आए जब कि उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था। अस्पताल में किसी ने उनकी मदद नहीं की। इलाज के इंतजार में वह रात 9 बजे तक भटकते रहे। जब किसी ने नहीं सुनी तो वे घर लौट गए। पिता वैद्यनाथ ने बताया, हमें नहीं पता था कि किस विभाग में इलाज होगा। कोई कुछ भी नही बता रहा था। डॉक्टर ने यह कहकर डिस्चार्ज कर दिया कि इसी लकवा मार गया है और इसका इलाज यहां पर नहीं होगा।

इलाज करने वाले रेजिडेंट डॉक्टर मित्तल कोठारी से जब पूछा गया कि आपने अवधेश को डिस्चार्ज क्यों कर दिया, जबकि सांस लेने में दिक्कत की वजह से उसकी हालत नाजुक बनी हुई थी। इस पर उन्होंने कहा कि मरीज के साथ उनके परिजन भी थे। छोटी बच्चियां भी थीं, अगर टीबी वार्ड में रखता तो उन्हें भी टीबी हो जाती। एक मरीज के चक्कर में कई सारे लोग बीमार हो जाते। फिलहाल वह लकवा का मरीज है उसे टीबी वार्ड में इलाज नहीं दिया जा सकता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक जब रेजीडेंट डॉक्टर मित्तल कोठरी से पूछा गया कि क्या उन्होंने मरीज को भर्ती ना करने से पहले अपने सीनियर डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने कहा कि नहीं इसमें पूछने की क्या जरूरत है। अगर आपको ऐसा लगता है कि मरीज को भर्ती करने की जरूरत है तो मैं उसे तुरंत भर्ती कर लेता हूं।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.