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मोदी सरकार ने तैयार की नई योजना, अब बिजली बनाने में होगा इस फ्यूल का उपयोग, होगी सेविंग

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अब सरकार ने डीज़ल का एक विकल्प निकाल लिया है। जी हां, अब डीज़ल से चलने वाली चीज़ें इससे चलेंगी। हम जिसकी बात कर रहे हैं वो हे मेथेनॉल।

जी हां, अब आपके घरों, अपार्टमेंट और मोबाइल टावर में चलने वाले जेनरेटर अब डीजल के बजाय मेथेनॉल से चल सकेंगे।

बता दें कि नीति आयोग ने एक प्राइवेट कंपनी के साथ मिलकर ऐसा फ्यूल सेल विकसित किया है जो डीजल जेनरेटर के मुकाबले न सिर्फ सस्ता होगा बल्कि प्रदूषण भी कम करेगा।

फिलहाल अभी नीति आयोग ने एक प्राइवेट कंपनी के साथ मिलकर इसका ट्रायल रन किया है। मेथेनॉल जेनरेटर से प्रति यूनिट बिजली का खर्च 10-12 रुपये आएगा। वहीं, डीजल जेनरेटर का प्रति यूनिट बिजली का खर्च 18-19 रुपये में पड़ता है।

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सबसे बड़ा फायदा इससे ये होगा की प्रदूषण में कमी आएगी। इससे डीजल से चलने वाले जेनरेटर के मुकाबले 30 % प्रदूषण कम होगा। नीति आयोग के साथ मिलकर जिस इंजीनियरिंग कंपनी ने ये तकनीक तैयार की है उसका नाम थर्मेक्स है।

बता दें कि इसके अनुसार सबसे पहले टेलिकॉम टावर में मेथेनॉल जेनरेटर को लगाने की योजना है। इसके लिए नीति आयोग ने एक निजी टेलीकॉम कंपनी से करार भी कर किया है।

मालूम हो की शुरू में करीब 10 हजार टेलिकॉम टॉवर में इसका इस्तेमाल होगा। इन टॉवरों में 2-3 महीने में मेथेनॉल जेनरेटर लगाने का लक्ष्य है। घरों और अपार्टमेंट में पावर बैकअप के लिए भी इनका इस्तेमाल होगा।

जानकारी के लिए बता दें कि इस मेथेनॉल जेनरेटर में मेथेनॉल को 260 डिग्री पर गर्म किया जाता है। गर्म करने से मेथेनॉल कार्बन डाय-ऑक्साइड और हायड्रोजन में टूट जाता है। फिर हाइड्रोजन को इकठ्ठा करके उसे फ्यूल सेल डालकर बिजली पैदा की जाती है।

अब देखने वाली बात होगी की इससे क्या बदलाव आते हैं और हमारे समाज पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

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