Loading...

वेटिंग और RAC के नाम पर अब TTE नहीं कर पाएंगे हेराफेरी, रेलवे ने निकाला ये समाधान

0 15

अक्सर जब हम ट्रेन में सफर करते है तो हम ये देखते हैं कि जो लोग RAC या वेटिंग टिकट पर यात्रा करते हैं उनमें से कुछ लोग TTE से सेटिंग करके सीट ले लेते हैं। वो किसी न किसी जुगाड़ से TTE से अपनी सीट कंफर्म करा लेते हैं।

अब इसके चक्कर में उन लोगों को सीट नहीं मिलती जो नियम के मुताबिक सीट के वाकई में हकदार हैं। अब रेलवे ने TTE के द्वारा धड़ल्ले से की जा रही इस ‘हेराफेरी’ का तोड़ निकाल लिया है।

जी हां, अब वेटिंग टिकट उसी की कन्फर्म होगी, जो उस सीट का हकदार होगा। इसके लिए रेलवे ट्रेन में मौजूद हर TTE तो हैंड हेल्ड मशीन देगा। इससे जिस क्रम में यात्रियों की वेटिंग या RAC होगी उसे सीट मिलती जाएगी। यानी की अब एक सिस्टमेटिक ढंग से सारा काम होगा।

ये मशीन कैसे चलेगी

Loading...

बता दें कि अब इस संबंध में TTE के पास नोटपैड के आकार की मशीन होगी जो इंटरनेट और रेलवे के मेन सर्वर से कनेक्ट होगी। इस मशीन पर संबंधित ट्रेन में यात्रियों की बुक हुई सीटों का चार्ट डिस्प्ले होगा।

अब मान लीजिए जो यात्री किसी कारणवश ट्रेन में सफर नहीं कर पाएंगे उनकी सीटों का ब्योरा TTE भरेगा और ये सारी जानकारी मेन सर्वर पर चली जाएगी।

TTE के क्लिक करने पर जो भी यात्री क्रमानुसार RAC और वेटिंग टिकटों पर यात्रा कर रहे होंगे उन्हें सीट आवंटित हो जाएगी।

अगर आपसे हम आसान भाषा में कहें तो वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को वो सीट सेल्फ ट्रांसफर हो जाएंगी और इसका मैसेज उनको मिल जाएगा। इस तरह TTE की हेराफेरी बिल्कुल खत्म हो जाएगी। और लोगो को सुविधाएं उपलब्ध हो जाएंगी।

कहां शुरू होगा सबसे पहले इससे काम

जानकारी के लिए बता दें कि इस मशीन का सबसे पहले प्रयोग फिरोजपुर मंडल रेलवे की अमृतसर-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस पहली ट्रेन बन गई है।

वहीं एक और ट्रेन फिरोजपुर-नई दिल्ली के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस में भी जल्द ही ये व्‍यवस्‍था लागू होगी।

यानि साफ़ है कि अगर दोनों ट्रेनों में ये प्रोजेक्ट सफल हो जाता है तो आने वाले दिनों में TTE को पैसे देकर सीट पाने की परंपरा ही ख़त्म हो जाएगी और आपको वोटिंग और आरएसी के बाद होने वाली सीट अलॉटमेंट एक व्यवस्थित ढंग से देखने को मिलेगी।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.