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मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो ने PM मोदी को दिखा दिया ठेंगा, इस योजना पर फेर दिया पानी

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मोदी सरकार की पूरे देश के गांवों को ब्रॉडबैंड से कनेक्ट करने की महत्वाकांक्षी योजना को करारा झटका लगा है। और ये झटका उनको खुद उनके करीबी माने जाने वाले मुकेश अंबानी की कंपनी जियो ने अन्य दो सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों के साथ मिलकर लिया है।

दरअसल मोदी सरकार ने अपनी इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 10,000 करोड़ रुपए की लागत की निविदाएं मंगाई थीं जिसके अंतर्गत करीब 2.5 लाख गांवों में 12.5 लाख वाईफाई हॉटस्पॉट लगाए जाने थे।

लेकिन मोदी सरकार की इस योजना पर करारा प्रहार करते हुए तीनों बड़ी कंपनियों रिलायंस जियो, भारतीय एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया ने इस योजना के लिए आवेदन नहीं किया है।

इस कारण की वजह से नहीं किया आवेदन

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एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार इस काम में मुनाफा यानी की प्रॉफिट का मार्जिन काफी कम था और काम में कम मुनाफे को देखते हुए कंपनियों ने ऐसा फैसला किया और आवेदन नहीं किया।

इसके अलावा वाईफाई हॉटस्पॉट लगाने में आने वाली तकनीकी दिक्कतों और शर्तों के कारण भी कंपनियों ने इसमें रूचि नहीं दिखाई है।

तकनीकी दिक्कत भी है एक वजह

एक वरिष्ठ दूरसंचार अधिकारी के मुताबिक़, बीबीएनएल की ओर से जारी की गई निविदा में कहा गया है कि कार्य करने वाली एजेंसी को पब्लिक वाईफाई पॉइंट या किसी अन्य उपयुक्त ब्रॉडबैंड तकनीक के माध्यम से 2.5 लाख गांव में कनेक्टिविटी प्रदान करनी होगी।

लेकिन तकनीकी निर्देशों में केवल वाईफाई एक्सेस पॉइंट्स के जरिए सुविधा देने की बात कही गई है। जानकारी के लिए बता दें कि यहां बीबीएनएल से तात्पर्य भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड है।

मार्च तक का रखा है लक्ष्य

जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार 2019 के चुनावों से पहले देश के सभी गांवों को ब्रांडबैंड से कनेक्ट करना चाहती है। इसके लिए सरकार ने मार्च 2019 तक की डेडलाइन तय की है।

इस योजना के तहत सरकार के स्वामित्व वाली एमटीएनएल, आईटीआई, टेलीकॉम कंसल्टेंट्स इंडिया (टीसीआईएल) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल) ने अपनी निवादाएं जमा की हैं। यही वजह है कि देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों की ओर से निविदा जमा नहीं करना इस योजना के लिए झटका माना जा रहा है।

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