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मुकेश अंबानी की इस शर्त से छोटे भाई अनिल अंबानी ने एक झटके में गवां दिए 400 करोड़ रुपए

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देश के सबसे आदमी अमीर मुकेश अंबानी ने अपने छोटे भाई का करोड़ों का नुकसान करा दिया है। ये नुक्सान मात्र एक शर्त से हो गया। जी हां सिर्फ एक शर्त से अनिल अंबानी का नुक्सान हो गया।

दरअसल मुकेश अंबानी की एक शर्त उनके छोटे भाई अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) पर खासी भारी पड़ी है।

मुकेश अंबानी की एक शर्त की वजह से टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने अनिल अंबानी की आरकॉम और मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो इन्फोकॉम के बीच हुई अरबों की स्पेक्ट्रम डील को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। इसकी वजह से बुधवार को कुछ ही घंटों के अंदर अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम की वैल्यू 440 करोड़ रुपए कम हो गई है।

कैसे हुआ ये सब

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ज्ञात हो कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम पर बकाया 2,947 करोड़ रुपए के स्पेक्ट्रम यूजर चार्ज के बदले टेलिकॉम डिपार्टमेंट (DoT) को बैंक गारंटी के स्थान पर 1,400 करोड़ रुपए की कॉरपोरेट गारंटी और एक लैंड पार्सल स्वीकार करने के लिए कहा था। हालांकि, इस फैसले से आरकॉम संतुष्ट नहीं है और स्पेक्ट्रम यूजर चार्ज की रकम पर राजी नहीं है।

बता दें कि एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने ये साफ़ कहा था कि अगर आरकॉम के द्वारा कॉरपोरेट गारंटी या लैंड पार्सल देने के संबन्ध में कोई समस्या होती है तो फिर जियो को यह भुगतान सहना होगा, क्योंकि वह स्पेक्ट्रम खरीद रही है।

हालांकि जियो ने इस शर्त को मानने से इंकार कर दिया और जियो ने किसी भी तरह की कोई देनदारी स्वीकार करने से मना कर दिया है और यही कारण रहा कि टेलीकॉम डिपार्टमेंट की तरफ से डील को मंजूरी नहीं मिली।

एक झटके में हुआ 440 करोड़ का नुक्सान

इस खबर के बाद अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम के शेयर में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। बता दें कि मंगलवार को आरकॉम का शेयर एक पहले के प्राइस 15.78 रुपए की तुलना में 10 फीसदी से ज्यादा गिरकर 14 रुपए के आसपास खुला। इससे कुछ ही मिनटों के भीतर आरकॉम की मार्केट वैल्यू लगभग 430 करोड़ रुपए घट गई। हालांकि बाद में गिरावट सीमित हो गई।

क्या है डॉट का बयान

डॉट यानी डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम ने इस मामले में साफ़ कहा कि, ‘ट्रेडिंग रूल्स स्पष्ट तौर पर कहते हैं कि डॉट दोनों ऑपरेटर्स या किसी एक से अपना बकाया चुकाने के लिए कह सकता है। अब चूंकि जियो ने अपनी तरफ से शर्त लगा दी है, ऐसे में हम इसे मंजूरी नहीं दे सकते हैं क्योंकि यह गाइडलाइंस के खिलाफ है।’

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