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2 महीने का कोर्स करके ये शख्स अब हर साल कर रहा है 5 लाख की कमाई, जानें कैसे

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आजकल सरकारों के लिए किसान का मुद्दा काफी अहम हो गया है। किसानों के मुद्दे पर पूरे के पूरे चुनाव लड़े जा रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें सभी किसानों की इनकम बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही हैं।

इसी उद्देश्य से सरकार ने खेती को एक करियर के रूप में बढ़ावा देने के लिए कई कोर्स भी शुरू किए हैं। इसके अलावा सरकारें अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से एग्रीकल्चर से जुड़े प्रोडक्ट्स के बिजनेस के बारे में जानकारियां दे रही है।

लोगों को इसका फायदा भी मिल रहा है। झारखंड के एक शख्स ने तो सरकार द्वारा शुरू किया गया 2 महीने का ऐसा ही एक कोर्स किया और आज वह सालाना 5 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं।

2 महीने के कोर्स से चमकाई किस्मत

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झारखंड के विजय भारथ के मुताबिक उन्होंने एग्रीकल्चर में पोस्ट ग्रैजुएशन किया है। 2002 में झारखंड में भारत सरकार की योजना एग्रीक्लिनिक और एग्री बिजनेस सिस्टम की शुरुआत हुई थी।

दरअसल इस योजना के तहत सरकार एग्रीकल्चर से जुड़े कोर्स कराती है। विजय भारथ ने इस कोर्स को करने का फैसला किया और मात्र 2 महीने में ये कोर्स किया। इस कोर्स को करने के बाद अब वह खेती से जुड़ी फिल्मों के माध्यम से किसानों को ट्रेनिंग देते हैं।

शुरू की मॉस सर्विस

2 महीने का कोर्स करने के बाद विजय ने किसानों को ट्रेनिंग देने फैसला किया। खेती से कैसे किसानों को जोड़ें इसके लिए उन्होंने मोबाइल बस सर्विस MASS (Mobile Agricultural School and Services) की शुरुआत की।

यह एक चलता-फिरता एग्रीकल्चर स्कूल है, जिसमें किसानों को एग्रीकल्चर की जानकारी, ट्रेनिंग और एग्री सर्विसेज के बारे में बताया जाता है।

इसके लिए उन्होंने लोन लेकर एक बस खरीदी और इस बस को ट्रेनिंग के लिए मोडिफाइड किया। इसके अंदर उन्होंने प्रोजेक्टर, स्क्रीन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड, इंटरनेट और क्रॉप संबंधित सीडी की व्यवस्था की।

100 लोगो को ट्रेनिंग देते हैं वो भी एक दिन में

विजय का कहना है कि किसान मजबूरी में खेती कर रहे हैं। खेती से किसानों को जोड़ने और एग्रीकल्चर को आकर्षक बनाने के लिए वह आगे आए हैं। ताकि किसानों की कमाई भी हो और इसमें दिलचस्पी भी आए।

इसके लिए वह अपने मोबाइल एग्रीकल्चर स्कूल के जरिए गांव में पहुंचते हैं और किसानों में खेती के बारे में रुझान पैदा करते हैं। वह इस काम को 10 साल से करते आ रहे हैं। वह एक दिन में एक गांव में 100 किसानों को ट्रेनिंग देते हैं।

बता दें कि वो अब तक 1.80 लाख किसानों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। वहीं उनको ये काम करते हुए 14 साल हो गए हैं। वह अब तक गया, नवादा, रोहतास, पटना, भोजपुर आदि स्थानों में किसानों को ट्रेनिंग दे चुके हैं।

किसानों से नहीं लेते एक पैसा

विजय किसानों से कोई चार्ज नहीं लेते हैं। बल्कि वो आत्मा, नाबार्ड, कुछ भारत सरकार की योजानाओं और एग्रीकल्चर डिपार्मेंट के लिए काम करते हैं।

इसके बदले में वो इन संस्थाओं से कंसल्टैंसी चार्ज लेते हैं। इससे उन्हें मंथली 35 से 40 हजार रुपए तक की कमाई हो जाती है।

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