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मोदी सरकार के इस प्लान से अब ग्रेजुएशन के दौरान ही छात्रों को मिल जाएगी नौकरी

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हमारे देश में बेरोजगारी एक बहुत बड़ा मुद्दा है। जाहिर है इस मुद्दे को राजनीती में भी खूब इस्तेमाल किया जाता है। विपक्ष भी इस मुद्दे पर बार-बार सरकार को घेरने का प्रयास करता है।

अब ऐसे में अगले साल लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं तो ये तो निश्चित ही है कि बेरोजगारी का मुद्दा एक बार फिर से सुर्खियों में रहेगा।

हालांकि मोदी सरकार ने इसका हल निकालने के लिए एक योजना तैयार की है। दरअसल नौजवानों खासकर अंडरग्रेजुएट को नौकरी के बड़े अवसर दिलाने के लिए मोदी सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय और श्रम एवं रोजगार तथा कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने संयुक्त रूप से एक बड़ी योजना को तैयार किया है।

दरअसल मोदी सरकार ने बड़े पैमाने पर अपरेंटिस प्रोग्राम शुरू करने का फैसला किया है। बता दें कि यह प्रोग्राम खासकर पर गैर तकनीकी छात्रों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। ऐसा इसलिए ताकि ग्रेजुएशन पूरी होने पर वो हुनरमंद हो जाएं और एक अच्छी नौकरी के लिए खुद को तैयार कर पाएं।

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क्या अवधि होगी इस प्रोग्राम की

जानकारी के लिए बता दें कि यह अपरेंटिस प्रोग्राम 6 से 10 महीने के अवधि का होगा। इसके तहत विभिन्न कंपनियों द्वारा अंडर ग्रेजुएट छात्र-छात्राओं को अपरेंटिस पर रखा जाएगा।

अपरेंटिस के द्वारा उन्हें स्टाइपंड भी दिया जाने की योजना है। बता दें कि यह अपरेंटिस प्रोग्राम ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है ताकि जब वे कॉलेज से बाहर आएं तो ग्रेजुएशन की डिग्री के साथ-साथ उनके हाथ में एक नौकरी भी हो।

नॉन टेक्निकल छात्रों को रखा है ध्यान में

टेक्निकल कोर्स की बात करें तो कैंपस प्लेसमेंट के जरिए तकनीकी शिक्षा वाले छात्रों को नौकरी मिल जाती है। लेकिन समस्या तो गैर तकनीकी छात्र-छात्राओं के सामने आती है।

इस समस्या को देखते हुए सरकार के तीनों मंत्रालय उद्योग जगत के साथ मिलकर हाई-क्लाविटी एपरेंटिस और बेसिक ट्रेनिंग का एक प्रोग्राम तैयार करवा रहे हैं। ताकि नॉन टेक्निकल छात्र छात्राओं को भी ग्रेजुएशन के बाद एक अच्छी से नौकरी मिल जाए।

10,000 करोड़ का होगा बजट

यहां ये बता दें कि राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के लिए केंद्र सरकार ने 10,000 करोड़ का बजट रखा है। इस नए प्लान के तहत अप्रेंटिस के लिए रखे गए प्रत्येक स्टूडेंट को मिलने वाले स्टाइपंड का 25 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार वहन करती है।

10 लाख स्टूडेंट्स को जोड़ा जाएगा

मालूम हो कि इस प्रोग्राम को अगले साल से शुरू कर दिया जाएगा और शुरूआती चरण में इससे लगभग 10 लाख छात्र-छात्राओं को जोड़ा जाएगा।

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