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अब कचरे से गैस बनाने के लिए लगाए जाएंगे 5000 से ज्यादा प्लांट, हजारों को मिलेगा रोजगार

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पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को कहा कि देशभर में 2023 तक करीब 5,000 कम्प्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) संयंत्र स्थापित किये जायेंगे।

उन्होंने कहा कि इन संयंत्र में कृषि अवशेष, गोबर और स्थानीय निकायों के ठोस कचरे से बायो गैस सृजित की जायेगी। इससे सालाना 1.5 करोड़ टन सीबीजी उत्पादन का अनुमान है।

बायोगैस को बढ़ावा देने की है योजना

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेश प्रधान ने यहां एसएटीएटी (किफायती परिवहन की दिशा में सतत वैकल्पिक ईंधन) पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा आयोजित एक रोड शो के दौरान यह बात कही।

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बता दें कि इस पहल के तहत बायोगैस को वैकल्पिक ईंधन रूप में बढ़ावा दिया जायेगा। मालूम हो कि इस पहल की शुरुआत एक अक्टूबर 2018 को हो गई थी। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि एसएटीएटी पहल का उद्देश्य कृषि अवशेष से सीबीजी पैदा करना है।

रोजगार के मौके बढ़ेंगे

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेश प्रधान ने कहा कि इस पहल से रोजगार के अवसरों में काफी वृद्धि आएगी और ओडिशा के विकास में तेजी भी आयेगी।

बता दें कि बायो गैस, प्राकृतिक गैस का विकल्प है और परिवहन क्षेत्र में सीएनजी की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है।

मालूम हो कि वर्तमान में देश में प्राकृतिक गैस की दैनिक खपत करीब 14 करोड़ घन मीटर है जिसमें से सिर्फ 7 करोड़ घन मीटर गैस घरेलू स्रोतों से मिलती है। शेष बची हुई गैस का आयात किया जाता है।

प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को बढ़ाना है लक्ष्य

मालूम हो कि वर्तमान में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी विभिन्न स्रोतों में केवल 6-7 प्रतिशत है। ऐसे में सरकार का लक्ष्य देश में इस्तेमाल किये जा रहे ऊर्जा की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 2022 तक बढ़ाकर 15 प्रतिशत करना है।

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