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3 दिन में सिर्फ 300 मीटर ही खिसक पाई भगवान विष्णु की ये मूर्ति, 240 टायरों वाला ट्रेलर भी हुआ फेल

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कभी सोचा हैं आपने भगवान की मूर्ति को एक जगह से उठाने के लिए दो साल का समय भी लग सकता हैं। नहीं न ! लेकिन सच में ऐसा भी हुआ भी हैं। बता दे तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले से भगवान विष्णु की पत्थर की मूर्ति को बेंगलुरु के एक मंदिर में पहुंचाया जाना था। जिसकी कोशिश लगातार दो सालों से की जा रही थी।

300 tonne Vishnu statue moved 300 metres in 3 days

लेकिन इसके बाद भी ये काम पूरा नहीं हुआ। लेकिन बीते दिनों  64 फीट लंबी और 300 टन वजनी मूर्ति को बेंगलुरु तक पहुंचाने के लिए 240 टायरों वाला ट्रेलर भी बुलवाया गया। लेकिन उसके बाद भी सफलता प्राप्त नहीं हुई। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार , “तीन दिनों में यह मूर्ति सिर्फ 300 मीटर ही आगे बढ़ पाई है। इस के बाद ट्रेलर के कई टायर भी बदलने पड़े हैं।”

300 tonne Vishnu statue moved 300 metres in 3 days

शिफ्ट करने में लगेंगे 50 दिन

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तिरुवन्नामलाई के कलेक्टर केएस कंदसामी ने कहा हैं कि , ”भगवान विष्णु की इस मूर्ति को शिफ्ट करने में करीब 50 दिन लगेंगे।’ मूर्ति को बेंगलुरु तक पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से कंदसामी को नोडल अफसर की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने मौके पर पहुंचकर प्रोग्रेस का जायजा भी लिया और मंदिर प्रशासन से भी बात की हैं।

300 tonne Vishnu statue moved 300 metres in 3 days

” मुंबई की लॉजिस्टिक फर्म रेशमासिंह ग्रुप के 30 मेंबर्स का एक क्रू को इस मूर्ति की शिफ्टिंग करने के काम में लगाया हुआ हैं। जिन्हें मूर्ति को साइट से मेन रोड तक लाने के लिए मिट्टी वाली रोड से गुजरते हुए बहुत ज्यादा दिक्कत आयी। वही बिन मौसम हुई बरसात इ भी इस काम को और बिगाड़ दिया।

सबसे छोटा रास्ता हैं सबसे मुश्किल

300 tonne Vishnu statue moved 300 metres in 3 days

रेशमसिंह ग्रुप के मैनेजर राजन बाबू ने बताया हैं कि,  “ट्रेलर जब उस 500 मीटर के मिट्टी और कीचड़ वाले रास्ते को पार कर लेगा और थेल्लर-देसुर रोड पर आ जाएगा तो उसे सामान्य स्पीड पर बिना किसी परेशानी के आगे बढ़ाया जा सकता है।”

11 अवतार के साथ 12 हाथों वाली मूर्ति

ये सपना एक रिटायर्ड गर्वंमेंट डॉक्टर का था कि वो बेंगलुरू के मंदिर में 108 फीट ऊंची विश्वरूप भगवान विष्णु की प्रतिमा लगवाए। जिसमें 11 अवतार, 22 हाथ के साथ सात सिर वाले नागराज हों। इतना ही नहीं डॉक्टर ने अपने इस सपने को पूरा करने के लिए लगातार पांच साल खूब मेहनत भी की थी।

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