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SBI के इस फैसले से बढ़ा आम आदमी पर बोझ, अब चुकाने होंगे पहले से ज़्यादा पैसे

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भारत के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने आम आदमी को एक करारा झटका देते हुए एमसीएलआर बढ़ाने का फैसला कर लिया है। बता दें कि बैंक के इस फैसले से होम, ऑटो और पर्सनल लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी।

वैसे कुछ प्राइवेट बैंकों के द्वारा अभी कुछ ही दिनों पहले MCLR की दरें बढ़ाईं गई थी जिसके बाद अटकलों का बाजार इस बात को लेके गर्म था कि अब एसबीआई भी ऐसा ही कोई कदम उठा सकती है।

बता दें की एसबीआई से पहले ये दरें बढ़ाने वाले बैंक थे ICICI बैंक, यूनियन बैंक, डीसीबी बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक। इन सभी बैंकों ने MCLR की दरें बढ़ाई थीं।

ICICI बैंक ने लोन की दरों में 0.10 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। ICICI बैंक की नई MCLR की दर 8.8 फीसदी है।

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अब एसबीआई ने भी ये दरें बढ़ा दी हैं। SBI ने MCLR की दर में 0.05 फीसदी की बढ़ोतरी की है। बता दें कि लोन की नई दरें तुरंत प्रभाव से ही लागू हो गई हैं।

आपको बता दें कि एमसीएलआर वह दर होती है जिस पर किसी बैंक से मिलने वाले ब्याज की दर तय होती है।

वैसे आपको ये मालूम हो SBI के 42 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं। देशभर में बैंक की 24 हजार ब्रांच हैं. वहीं बैंक के करीब 60 हजार एटीएम हैं।

क्या होता है MCLR

MCLR का को मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट कहते हैं। इसमें बैंक अपने फंड की लागत के हिसाब से लोन की दरें तय करते हैं। बता दें कि इसकी इतनी ज्यादा अहमियत इसीलिए है क्योंकि इसके बढ़ने से आपके बैंक से लिए गए सभी तरह के लोन महंगे हो जाते हैं।

आम आदमी पर बढ़ता है बोझ

जाहिर है कि एमसीएलआर बढ़ने से आम आदमी को सबसे ज़्यादा नुकसान होता है। दरअसल आम आदमी को सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि उसका मौजूदा लोन महंगा हो जाता है और उसे पहले की तुलना में ज्यादा ईएमआई देनी पड़ जाती है। हालांकि इस दर के घटने के संबन्ध ने उल्टा होता है यानी की पहले के मुकाबले ईएमआई सस्ती हो जाती है।

MCLR में कब और कितनी आई वृद्धि

बता दें कि एसबीआई की 1 साल की MCLR दर 8.5 से बढ़कर 8.55 फीसदी हो गई है।

वहीं 2 साल की एमसीएलआर की दर 8.6 फीसदी से बढ़कर 8.65 फीसदी हो गई है।

और तो और 3 साल की MCLR अब 0.05 फीसदी बढ़कर 8.75 फीसदी हो गई है।

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