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खराब हो रहे डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक इंजन में बदलकर रेलवे ने रच दिया इतिहास

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भोले बाबा की नगरी काशी यानि की आज के वाराणसी में एक अद्धभुत कारनामा कुछ लोगों ने करके दिखलाया है।

दरअसल यहां लोकोमोटिव रेल इंजन कारखाना के इंजीनियरों ने खराब हो रहे डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक इंजन में बदलकर एक नया इतिहास रच दिया है।

दरअसल मेक इन इंडिया के चलते स्वदेशी तकनीक को अपनाते हुए इस काम को अंजाम दिया गया है।

बता दें कि गुरुवार को रेलवे ने बताया कि डीजल लोकोमोटिव को इलेक्ट्रिक इंजन में बदलने का काम केवल 69 दिनों में पूरा किया गया।

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जानकारी के लिए बता दें यह इंजन प्रदूषण मुक्त है और डीज़ल इंजन के मुक़ाबले बेहतर स्पीड और 10 हजार होर्स पावर की क्षमता देने में कारगर हैं। इससे लोकोमोटिव की क्षमता 2600 एचपी से बढ़कर 5000 एचपी हो गयी है।

अगले 35 वर्ष तक आएगा काम

ऐसा आकलन किया गया है कि इस इंजन का इस्तेमाल अब अगले 35 वर्ष तक माल ढोने के लिए किया जाएगा।

80 किमी प्रतिघण्टे की स्पीड से दौड़ेगा

बता दें कि यह इंजन मौजूदा माल ट्रेन का इंजन को रफ्तार के मामले में पछाड़ने में सक्षम है। जी हां, जहां वर्तमान माल गाड़ी के इंजन की रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटे की होती है वहीं इस नए इंजन को प्रतिघंटे 80 किलोमीटर की स्पीड तक दौड़ाया जा सकता है।

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