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महिला को थी यूट्रस की बीमारी, 30 साल की उम्र तक सूनी थी कोख, डॉक्टर्स ने लिया ऐसा फैसला और फिर

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मेडिकल हिस्ट्री में पहली बार ऐसा कुछ हुआ है जिसकी होने की उम्मीद नहीं थी यानी किसी ने सोचा नहीं होगा ऐसा भी कुछ मेडिकल हिस्ट्री में हो सकता है हालांकि ऐसा हो गया है आइए बनाते हैं ऐसा क्या है।

दरअसल एक मृत महिला के गर्भाशय प्रत्यारोपण के बाद 32 साल की एक मां ने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। महिला गर्भाशय की गंभीर बीमारी से जूझ रही थी और 30 साल तक उसकी कोख सूनी थी, जिसके बाद डॉक्टर्स ने ये बड़ा फैसला लिया।

अब तक यूट्रस की परेशानी से जूझ रही महिलाओं के पास गोद लेने या सरोगेट (किराए की कोख) मां का ही विकल्प था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

मौत से 10 घंटे बाद किया ट्रांसप्लांट

गर्भाशय देने वाली महिला जो की 45 वर्ष की थी उसकी स्ट्रोक से मौत हो गई थी। 10 घंटे के अंदर मृत महिला से गर्भाशय को निकालकर उसे दूसरी महिला में प्रत्यारोपित कर दिया गया।

5 महीने बाद गर्भाशय को बॉडी द्वारा स्वीकार न करने के कोई संकेत नहीं मिले और महिला का मासिक चक्र नियमित पाया गया।

प्रत्यारोपण के 7 महीने बाद महिला के निषेचित अंडे इम्प्लांट किए गए। 10 दिन बाद डॉक्टरों ने उसके गर्भधारण की सूचना दी।

32 हफ्ते तक प्रेग्नेंसी नॉर्मल थी। 36वें हफ्ते में महिला ने 2.5 किलो की बच्ची को सीजेरियन तरीके से जन्म दिया।

और भी कई देशों में की जा चुकी है कोशिश

बता दें कि इस तरह की कोशिश मेडिकल क्षेत्र में और भी कई देशों में हो चुकी है। वर्ष 2013 में स्वीडन में पहली बार जीवित महिला का गर्भाशय प्रत्यारोपित किया गया था। इसके बाद से अब तक 10 बार ऐसा किया जा चुका है।

जीवित महिला से गर्भाशय मिलना काफी मुश्किल होता है। लिहाजा, डॉक्टर ऐसी प्रक्रिया की खोज में थे जिससे मृत महिला का यूट्रस इस्तेमाल किया जा सके।

साओ पाउलो यूनिवर्सिटी के डॉक्टर दानी एजेनबर्ग के मुताबिक, हमारे नतीजे बताते हैं कि नया विकल्प इनफर्टिलिटी से जूझ रही महिलाओं के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। और मेडिकल क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए उचित कदम है।

डॉक्टर एजेनबर्ग के मुताबिक, मरने के बाद कई लोग अपने अंग दान करना चाहते हैं। इनकी संख्या जीवित रहते हुए अंग दान करने वालों से कहीं ज्यादा होती है।

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