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चीन खाना चाहता है भारत के अंगूर और अनार, वहीं भारत को खिलाना चाहता है सेब और पनीर

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भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा तो हमेशा चलती रहती है फिर चाहे वह ग्लोबल लेवल पर हो या फिर अपने अपने देश के लेवल पर।

जब व्यापार की बात आती है तो हालांकि चीन का पलड़ा भारत पर थोड़ा भारी नजर आता है। ऐसे में चीन ने आगे आकर एक प्रस्ताव भारत की ओर दिया है। इस प्रस्ताव का मतलब व्यापार में आदान-प्रदान को बैलेंस करना है।

चीन चाहता है कि वह भी भारत से व्यापार के रिश्ते और ज्यादा बढ़ाए इसलिए कुछ ऐसे चीजों को जिनको चीन अभी तक आयात नहीं करता था भारत से अब चीन ने उन चीजों को आयात करने का फैसला ले लिया है।

हालांकि इसके बदले में चीन ने भी कुछ शर्त रखी है जिसके तहत चीन के कुछ चीजों को भारत को आयात करना पड़ेगा।

आइए समझते हैं कि वह क्या चीजें हैं और इन दोनों के बीच व्यापार की कौन सी नई परिभाषा लिखी जानी है।

दरअसल चीन ने ये फैसला किया है कि वो अब भारत के अंगूर, अनार, सोयामील और मछली का आयात करेगा। इससे पहले चीन भारतीय शक्कर और चावल को आयात करने का फैसला ले चुका है।

हालांकि चीन की यह भी इच्छा है कि भारत उससे दूध, डेयरी प्रोडक्ट, सेब और नाशपाती खरीदना फिर से शुरू कर दे।

दोनों देशों के बीच व्यापार

दोनों देशों के बीच व्यापार के आंकड़ों पे एक नज़र डालें तो वर्ष 2017-18 में भारत से चीन को किया गया निर्यात 2.33 लाख करोड़ रुपए का रहा जबकि भारत को होने वाले चीनी आयात की कीमत 5.38 लाख करोड़ रुपए रही।

आयात निर्यात को होगा बढ़ाना

दरअसल हाल ही में चीन के उप मंत्री Hu Wei ने भारतीय मंत्रियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में व्यापार से संबंधित काफी चर्चाएं हुई थी।

भारत ने भिंडी, चीकू, दूध और बोवाइन मीट का निर्यात बढ़ाने की बात पर जोर दिया था। तो वहीं दूसरी तरफ चीन ने दूध, डेयरी प्रोडक्ट, सेब और नाशपाती की खरीद को फिर से शुरू करने की बात कही थी।

वैसे भारत ने ये भी प्रस्ताव रखा था कि शक्कर और अंगूर के निर्यात के लिए नॉन-टैरिफ बैरियर को खत्म किया जाए।

आयात करने से पहले चीन करेगा निरीक्षण

बता दें कि उत्पादों को आयात करने से पहले चीन देश के फलों के बागानों और फैक्ट्रियों का निरीक्षण करेगा। इस सप्ताह चीन अंगूर के बगीचों और अगले सप्ताह सोयाबीन की जांच करेगा। वहीं अनार के बागों और प्रोसेसिंग यूनिट्स का निरीक्षण भी चीन कर सकता है।

पुरानी बातों को भुलाकर व्यापार की नई कहानी लिखेंगे दोनों देश

जानकारी के लिए बता दें कि वर्ष 2008 में जब चीन के डेयरी उत्पादों में मेलामाइन (Melamine) पाया गया था, तो भारत ने इनका आयात रोक दिया था। इसकी काफी चर्चा हुई थी। और इस पर काफी विवाद भी हुआ था। वहीं चीन ने भी ऐसा ही कुछ किया था जब भारत में foot-and-mouth महामारी फैलने के बाद चीन ने भारत से बोवाइन मीट का आयात बंद कर दिया था।

दोनों देशों के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि दोनों देशों ने एक-दूसरे से किए जाने वाले अायातों में कटौती कर ली थी।

हालांकि अब समय बदल गया है और दोनों देश पुराणी बातों को भुलाकर व्यापार की एक नई परिभाषा लिखना चाहते हैं।

इसी संबंध में अब चीन भारत से casienate (मिल्क प्रोटीन) खरीदने को तैयार है, लेकिन इसके बदले वह चाहता है कि भारत उससे डेयरी प्रोडक्ट खरीदे।

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