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अचानक सुन्न हो गया महिला का पैर, टेस्ट कराया तो पता चला दिमाग में है 25 कैंसर वाले टयूमर, और फिर

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क्या होगा जब आपको पता चले कि डॉक्टर आपसे बोले कि आपके दिमाग में 25 टयूमर हैं जी हां 25 टयूमर और आप अब सिर्फ 6 से 8 महीने ही जी पायेंगे उसके बाद आप मर जाएंगे। आप इस खबर को कैसे लेंगे? जाहिर सी बात है आपके पैरों के नीचे की ज़मीन खिसक जाएगी और आप सहम जाएंगे।

लेकिन इंग्लैंड में रहने वाली एक महिला ने इस खबर को अलग ढंग से लिया और डॉक्टरों की कहीं वह बात जिसमें उन्होंने बोला था कि वह सिर्फ 6 से 8 महीने ही जीवित रह पाएगी, उसको उस महिला ने गलत साबित कर दिया लेकिन ऐसा कैसे हुआ आइए जानते हैं।

पैर हो गए थे सुन्न

ये कहानी इंग्लैंड में रहने वाली महिला हैदी स्पेंस (45) की है, जो कि पेशे से बिजनेस एनालिस्ट है। हैदी का हसबैंड डेविड (39) एक इंजीनियर है और ये कपल अपने दोनों बच्चों विलियम (7) और लुईस (4) के साथ रहता है।

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पिछले साल मदर्स डे पर, हैदी का दायां पैर अचानक सुन्न पड़ गया था। कई टेस्ट कराने पर पता चला कि वो चौथी स्टेज के फेफड़ों के कैंसर से जूझ रही है।

कैंसर उसके शरीर में बुरी तरह फैल चुका था। वो दिमाग और हड्डियों को भी अपनी चपेट में ले चुका था। डॉक्टर ने कहा कि उसके दिमाग में 25 ट्यूमर हैं और वो 6 से 8 महीने तक ही जी पाएगी।

इस खबर से हैदी के साथ उनके पति भी हिल गए थे और उनको अब यह समझ में नहीं आ रहा था कि अब हमारे परिवार का क्या होगा।

डॉक्टर ने बताया कि उसकी बीमारी ठीक नहीं हो सकती और उसे इलाज के लिए कीमोथैरेपी कराने की सलाह दी, ताकि वो ज्यादा से ज्यादा वक्त अपने बच्चों के साथ गुजार सके। हालांकि हैदी डॉक्टर की बात से संतुष्ट नहीं थी।

अपने स्तर पर ढूंढा इलाज

हैदी ने अपने लेवल पर इलाज का तरीका खोजने के लिए इंटरनेट की मदद ली और उसे एक बिल्कुल नए तरीके के US टेस्ट के बारे में पता चला। जिसके जरिए ये पता लगता है कि कौन सी दवाएं मरीज के लिए सबसे असरकारक साबित होगी।

हैदी ने मेनचेस्टर के विथिंगटन में स्थित कैंसर ट्रीटमेंट सेंटर में ट्रायल बेसिस पर ये टेस्ट कराया। इस क्लिनिक में कई बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटीज भी अपना इलाज करा चुकी हैं।

वहां हुए टेस्ट से पता चला कि हैदी के 5 जीन्स बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं, जिनमें से दो इलाज के लिए उपलब्ध हैं।

उसे वहां पर कुछ दवाएं दी गईं, इसके साथ ही रेडियोथैरेपी भी कराने के लिए कहा गया। इसका जबरदस्त असर हुआ और तीन ही महीने में उसकी बॉडी से ब्रेन ट्यूमर के लक्षण पूरी तरह चले गए।

हालांकि फिलहाल वो पूरी तरह ठीक नहीं हुई है, लेकिन उसका कैंसर नियंत्रण में आ चुका है और उसकी बॉडी में बीमारी का कोई बाहरी संकेत नहीं बचा है।

हैदी का कहना है कि ‘अपनी जिंदगी बचाने के लिए मैं उन टेस्ट की अहसानमंद हूं और हमेशा डॉक्टर्स की बात सुनना जरूरी नहीं रहता।

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