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इस देश में है एक बर्गर की कीमत 50 लाख, नोट गिनकर नहीं बल्कि तौलकर लेते हैं दुकानदार

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अक्सर जब आप किसी किसी आप किसी दुकान पर जाते हैं कोई सामान लेने तो आप उस समान की जो भी कीमत होती है उसके पैसे चुका देते हैं और सामान ले लेते हैं लेकिन क्या कभी आपने नोटों को तौल कर कोई सामान लिया है? नहीं ना, नोटों को तौल कर कौन संभाल लेता है लेकिन एक देश है जहां पर कुछ ऐसी ही स्थिति बनी हुई है।

दरअसल इस देश का नाम है वेनुजुएला इस देश की आर्थिक स्थिति इस कदर तक खराब हो खराब हो चुकी है छोटी सी छोटी चीजों के भी भी बड़ी मुद्रा में पैसे चुकाने पड़ रहे हैं लेकिन ऐसा हुआ क्यों? आइए जानने की कोशिश करते हैं।

वेनुजुएला में महंगाई अपने चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। इस देश के लोग महंगाई की मार से बहुत ही ज्यादा परेशान है। वेनेजुएला में महंगाई दर 10 लाख फीसदी तक बढ़ चुकी है, जिस कारण वहां रोजमर्रा की चीज़ों के दाम कई गुना बढ़ गए हैं.

कभी दक्षिण अमेरिका के सबसे अमीर देशों में से एक रहे वेनेजुएला की इस हालत के पीछे गलत सामाजिक प्रयोग जिम्मेदार रहे हैं।

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इस देश की अर्थव्यवस्था अब इतने बुरे दौर में पहुंच चुकी है कि हर दिन पांच हजार लोग दूसरे देशों की तरफ पलायन कर रहे हैं। यहां के पेशेवर अब अस्पताल और विश्वविद्यालयों को छोड़कर जा रहे हैं।

मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनुजुएला में वकालत की पढ़ाई कर चुके लोग अब मजदूर या सेक्स वर्कर के तौर पर काम करने के लिए मजबूर हैं। वहीं बताया जा रहा है कि ब्यूरोक्रेट स्तर के अधिकारी घरों में काम कर रहे हैं।

इस संकट की वजह से पास ही के देश त्रिनिडाड एंड टोबैगो में परेशानी खड़ी हो गई है हो गई है है क्योंकि ज्यादातर शरणार्थी इसी देश में शरण ले रहे हैं जिससे यहां की सरकार की चिंताएं बढ़ गई है। उनको समझ में नहीं आ रहा है कि आ रहा है कि अब वह क्या करें क्योंकि काफी बड़ी मात्रा में उस देश से पलायन कर रहे लोग इस देश में शरण ले रहे हैं। इस वजह से सीमा पर मानव तस्करी की शुरुआत भी हो चुकी है।

जानकारी के लिए बता दें कि 1950 से 1980 के दशक तक वेनेजुएला आर्थिक रूप से सशक्त देश था। यहां तेल के कई भंडार मौजूद थे लेकिन फिर तेल के दामों में उतार चढ़ाव, मुद्रा संकट और सरकार की गलत नीतियों ने ने इस देश को मुश्किल में धकेल दिया।

1999 में ह्यगो शावेज देश के राष्ट्रपति बने, जिनकी समाजवाद की नीति ने कई व्यवसायों को तबाह कर दिया।

2013 में पहले बस ड्राइवर और फिर यूनियन लीडर निकोलस मादुरो देश के राष्ट्रपति बने, जिनके आने के बाद देश की अर्थव्यस्था की हालत और खराब हो गई।

अमेरिका और यूरोप के कई देशों ने वेनेजुएला से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगा रखा है, जिस कारण वहां की तेल बिक्री न के बराबर हो गई है।

राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अनुसार वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों की वजह से ही देश की अर्थव्यस्था की हालत खराब हुई है।

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