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इस अरबपति को लगा करारा झटका, एक ईमेल से डूब गए 10 हज़ार करोड़

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मशहूर अरबपति दिलीप सांघवी को एक करारा झटका लगा है और यह झटका एक व्यक्ति के द्वारा भेजे गए ईमेल से लगा है। जी हां, दरअसल एक विसलब्लोअर ने सेबी को एक मेल भेजा है जिसमें कुछ ऐसी सूचनाएं प्रदान की गई हैं जिसकी वजह से दिलीप सांघवी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

दरअसल सेबी को भेजे गए इस ईमेल में सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज के फाउंडर-मैनेजिंग डायरेक्टर दिलीप सांघवी पर और उनके ब्रदर-इन-लॉ सुधीर वालिया पर धर्मेश दोशी के साथ वित्तीय अनियमितता में लिप्त होने का आरोप लगाया है।

इस खबर से सोमवार को सन फार्मा को शेयर लगभग 10 फीसदी तक टूट गया और उसकी मार्केट वैल्यू लगभग 10 हजार करोड़ रुपए घट गई।

150 पेज का है लेटर

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विसलब्लोअर ने मार्केट रेग्युलेटर सेबी को 150 पेज का लेटर भेजा है। इस लेटर में उसने कई आरोप लगाए हैं। बता दें कि सेबी ने 2001 में शेयर बाजार में हुए स्कैम के बाद धर्मेंद्र दोशी और केतन पारेख को मार्केट से बैन कर दिया था।

दोशी, पारेख के पुराने सहयोगी हैं। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में व्हिशलब्लोअर की सत्यता की पुष्टि नहीं की गई है।

केतन पारेख स्कैम में आया था दोशी का नाम

केतन पारेख स्कैम पर वर्ष 2001 में सेबी द्वारा दिए गए आदेश के मुताबिक, ‘इस स्कैम में जेरमिन कैपिटल एलएलसी, जेरमिन कैपिटल पार्टनर्स और धर्मेश दोशी/केतन पारेख के बीच संबंध सामने आए हैं।’

और शिकायत के अनुसार, वर्ष 2002-07 के दौरान सन फार्मा ने फॉरेन करंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स (FCCB) के कई बड़े राउंड्स में भारी अनियमितताएं की थीं, जिनका प्रबंधन जेरमिन कैपिटल एलएलसी ने किया था।

यानी की इसी बात से ये जाहिर होता है कि जेरमिन कैपिटल एलएलसी से इस कंपनी के सम्बन्ध हैं।

कैसे हुई थी FCCBs की डील

व्हिसलब्लोअर ने जो आरोप लगाए हैं उनके अनुसार इन FCCBs के लिए शुरुआती तौर पर बोमिन फाइनेंस लिमिटेड, फर्स्ट इंटरनैशनल ग्रुप, ऑर्बिट इन्वेस्टमेंट और सन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ने सब्सक्राइब किया था।

हालांकि बाद में हुए ट्रांजैक्शंस के माध्यम से इन्हें ऑरेंज मॉरिशस इन्वेस्टमेंट लि. और हिपनॉस फंड लि. को अलॉट कर दिया गया था।

व्हिसलब्लोअर ने यह लिखा कि, ‘सन फार्मा के शुरुआती एफसीसीबी से बड़ा फंड तैयार करने के बाद ग्रुप (दोशी, वालिया, सांघवी और सन फार्मा) ने एफसीसीबी कन्वर्जन या एफसीसीबी कन्वर्जन से मिले पैसे से दूसरी कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी खरीदना शुरू किया।’

जानकारी के लिए बता दें कि इस संबंध में सन फार्मा ने कहा है कि, ‘सेबी ने अभी तक इस संबंध में हमसे संपर्क नहीं किया है।’

ब्रोकरेज कंपनियों की ली मदद

व्हिसलब्लोअर के मुताबिक, ” सन फार्मा ग्रुप ने टारगेट कंपनियों की पहचान के लिए ब्रोकरेज कंपनियों के इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया और फिर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तरीके से शेयर की कीमत को बढ़ाना शुरू किया।

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