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भारत में आज भी छुपे हुए हैं कई रहस्यमयी और बेशकीमती खजाने, सालों से हो रही है उनकी खोज

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भारत अब भले ही एक प्रगतिशील देश हो और दुनिया के कई देश जो भारत से बाद में आजाद हुए थे आज भारत से आगे निकल कर आधुनिक हो गए पर भारत के पास वो गौरवशाली इतिहास तो है जो शायद और किसी देश के पास तो नहीं होगा।

भारत को प्राचीन काल में सोने की चिड़िया कहा जाता था क्योंकि उस समय भारत बेहद अमीर राज्य हुआ करता था। अमीर होने की वजह से भारत पर लगातार विदेशी आक्रमणकारियों के हमले होते रहे जो यहाँ के खजाने लूट कर ले गए।

आज हम आपको भारत के कुछ ऐसे ही प्रसिद्ध खजानों के बारे में बता रहे है जिनकी खोज सालों से की जा रही है पर अब तक इनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

बिम्बिसार का खजाना

ईसा पूर्व पांचवी शताब्दी में बिम्बिसार मगध का राजा था। इसके बाद ही मौर्य साम्राज्य का विस्तार शुरू हुआ था। माना जाता है कि बिहार के राजगीर में बिम्बिसार का खजाना छिपा हुआ है।

यहां पर स्थित दो गुफाओं (सोन भंडार गुफा) में पुरानी लिपि में कुछ लिखा हुआ है, जिसे अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है। माना जाता है कि इसमें ही खजाने से जुड़े संकेत छिपे हो सकते हैं।

वैसे खजाने से जुड़े संकेत इतने ठोस थे कि अग्रेजों ने इस खजाने को खोजने के लिए तोप का सहारा लिया लेकिन असफल रहे थे।

कृष्णा नदी का खजाना

आंध्र प्रदेश के गुंटूर में कृष्णा नदी के तटीय इलाके काफी समय से अपने हीरों के लिए प्रसिद्ध थे। एक समय में यह इलाका गोलकुंडा राज्य में शामिल था। विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा भी यहीं की खदानों से निकाला गया था।

माना जाता है कि इलाके में कृष्णा नदी के तट पर कई हीरे खोजे जाने का इंतजार कर रहे हैं।

राजा मान सिंह का खजाना:

1580 में मान सिंह ने अफगानिस्तान पर जीत हासिल की थी। माना जाता है कि इस जीत में मिले खजाने को मान सिंह ने किसी स्थान पर छिपा दिया था।

यह कहानी कितनी ठोस थी, इसका पता इस बात से चलता है कि आजादी के बाद इमरजेंसी के दौरान तत्कालीन केंद्र सरकार ने इस खजाने को खोजने का आदेश दिया था।

जहांगीर का खजाना

राजस्थान से 150 किलोमीटर दूर अलवर का किला मौजूद है। इलाकों में प्रचलित कहानियों के मुताबिक मुगल शहंशाह जहांगीर अपने निर्वासन के दौरान अलवर में रहा था।

इस दौरान जहांगीर ने अपना खजाना यहां किसी गुप्त जगह पर छिपा दिया था। कई लोग मानते हैं कि यह खजाना अभी भी अलवर में कहीं दबा हुआ है।

श्री मोक्कम्बिका मंदिर का खजाना

कर्नाटक के पश्चिमी घाट में कोलूर में स्थित मोक्कम्बिका मंदिर में भी खजाना होने की बात कही जाती है।

मंदिर के पुजारी के मुताबिक मंदिर में सांपों के खास निशान बने हुए हैं। भारतीय मान्यताओं के मुताबिक छिपे हुए खजानों की रक्षा सांप करते हैं। इस खजाने का अनुमान इस बात से ही लगाया जा सकता है कि मंदिर में रखे जवाहरात की कीमत 100 करोड़ रुपए आंकी गई है।

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