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नौकरी मांगने पर अनपढ़ कह कर भगा दिया, तब ली सौगंध और आज बच्चो को पहुंचाया इस मुकाम तक

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जब इरादे मजबूत होते हैं तो कोई भी मुश्किल नहीं रोक पाती इसी बात को सच साबित करते हुए सहरिया आदिवासी ने आज अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर काबिल बनाएं. दरअसल 32 साल पहले गेल इंडिया में नौकरी मांगने गए सहरिया आदिवासी को अधिकारियों ने अनपढ़ होने पर नौकरी न देकर अपमानित किया था. तब से उसने मेहनत मजदूरी करके अपने 6 बच्चों को पढ़ाया जिनमे से आज उनकी एक बेटी सरकारी टीचर है तो दूसरी पुलिस कांस्टेबल.

32 साल पहले गेल इंडिया लिमिटेड में नौकरी मांगने गए राघोगढ़ के वार्ड नंबर 5 के लालापुरा में रहने वाले 24 वर्षीय कल्लू राम सहरिया को वहां पर अनपढ़ होने के कारण नौकरी नहीं मिली. अधिकारियों ने उसको अपमानित करते हुए कहा कि तुम अनपढ़ हो तुम किसी लायक नहीं हो, तब उसने सौगंध खा ली और अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर आज इस मुकाम तक पहुंचाया. कल्लू राम ने अपनी पत्नी काशलुल को कहा कि वे अपने बच्चों को नौकरी करते देखना चाहते है.

चार बेटी और दो बेटे के पिता कल्लू ने अपनी मेहनत के दम पर बेटी रेखा को 12वीं तक पढ़ाकर 2010 में संविदा टीचर के पद तक पहुंचाया, उनकी दूसरी बेटी ज्योति का चयन 2018 में मध्य प्रदेश पुलिस में हो गया.

घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण कालूराम और उसकी पत्नी दिन में मजदूरी करके शाम को बीड़ी बनाने का काम करते थे. इस पैसे से वह परिवार का खर्च चलाने के साथ-साथ अपने बच्चों को पढ़ाते भी थे. इस संघर्ष के बाद अब जाकर उन्हें कहीं यह मुकाम मिला है.

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