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अघोरियों की होती है एक अलग ही दुनिया, जितनी कठिन उतनी ही रहस्यमयी

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हिंदू धर्म में भगवान शिव को सबसे ऊंचा दर्जा दिया जाता है.देवों के देव कहे जाने वाले भगवान शिव की आराधना के 2 तरीके होते हैं पहला सात्विक तो दूसरा तरीका तामसिक. सात्विक तरीके से आप भगवान को पूजा फल फूल आदि से प्रसन्न कर सकते हो तो,तामसिक तरीके के अंतर तंत्र मंत्र आदि से भगवान को प्रसन्न किया जाता है. अघोर पंथ के जन्मदाता भगवान शिव को तंत्र शास्त्र का देवता माना जाता है.

कौन होते हैं अघोरी

अघोरी का अर्थ होता है जिसमें कोई गौर नहीं हो अर्थात बहुत सरल सहज और बिना भेदभाव वाला. अघोरी हमेशा से लोगों के लिए कोतूहल का विषय बने हुए होते हैं. अघोरियों की साधना विधि बहुत कठिन और रहस्यमई होती है. अघोरी अपना एक अलग ही विधि-विधान रखते हैं और हर चीज में उतना ही स्वाद देखते हैं जितना स्वादिष्ट पकवानों में होता है. अघोरी मल से लेकर मरे हुए जीव का मांस भी खा लेते हैं.

अघोरियों की तरह ही उनकी दुनिया भी बहुत रहस्यमई है. जिस पर अघोरी की कृपा हो गई समझो वह सब कुछ पा जाएगा तो आज हम ऐसे ही कई बातें आपको बताने जा रहे हैं, जो अघोरियों को बाकी दुनिया से अलग करती है

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● अघोरीयों की साधना बड़ी विचित्र होती है. वे 3 तरह की साधना करते है. पहली शिव साधना में मुर्दे के ऊपर पैर रखकर तो दूसरी शव साधना में मुर्दे के ऊपर बैठकर साधना करते हैं. इन साधनाओ में मुर्दे को शराब और मांस का प्रसाद चढ़ाया जाता है. तीसरी साधना होती है श्मशान साधना, जहां पर शवपीठ की पूजा करके गंगाजल और मावे का प्रसाद चढ़ाया जाता है.

● अघोरीयो के पास एक विचित्र शक्ति होती है जिससे वह मुर्दे से भी बात कर सकते हैं. कई लोग इस बात को नहीं मानते हैं लेकिन पूर्णतया मना भी नहीं किया जा सकता.

● अघोरी अपने स्वभाव के राजा होते हैं अर्थात अघोरी किसी बात के लिए अड़ जाते है तो उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं. गुस्सैल अघोरी किसी भी हद तक जा सकता है.

● अघोरियों का रहन-सहन सबसे अलग होता है. अघोरी श्मशान में कुटिया बनाकर रहते हैं और उस कुटिया में एक छोटी सी धूनी हमेशा जलाकर रखते हैं. अघोरी गले में धातु की बनी नर मुंड की माला पहनते हैं और मन को हमेशा शांत रखते हैं. अघोरियों को सिर्फ कुत्ते पालना पसंद है.

● अघोरी खाने के मामले में स्वादहीन से ही होते हैं इसी लिए वो हर चीज को खा जाते हैं. सिर्फ गाय के मांस को छोड़कर वे मल मूत्र तक खा पी सकते हैं.

● अघोरी अपने आप में ही मस्त रहते हैं और ज्यादातर समय सिद्ध मंत्र का जाप करते रहते हैं. अघोरी ना तो किसी से बात करते हैं और ना ही आम लोगों से कोई संपर्क रखते हैं.

● अघोरी तांत्रिक शक्तियों के भी ज्ञाता होते हैं इस कारण वे आत्माओं को अपने वश में कर सकते हैं. अघोरी अपनी साधना श्मशान में ही करते हैं.

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