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मोदी सरकार के लिए ‘नासूर’ बन सकता है ‘रुपया’, इस वजह से हो सकती है ये 5 समस्याएं…..

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मौजूद समय मे भारतीय रुपया, डॉलर के मुकाबले 70 के स्तर को लांघते हुआ अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गिरा है। इससे इम्पोर्ट बिजनेस वाली कंपनियों को तगड़ा झटका लग सकता है। दूसरी और आईटी और फार्मा जैसी एक्सपोर्ट कम्पनियों को फायदा हो सकता है। महंगाई बढ़ने केन्भी पूरे आसार दिखाई दे रहे है। अब मोदी सरकार विरोधियों के निशाने पर है।

रुपये के कमजोर होने से मोदी के सामने खड़ी हो सकती है यह 5 समस्याएं

1.82 लाख करोड़ रु बढ़ सकता है भारत का ऑयल इंपोर्ट बिल

लगातार कमजोर होते रुपये की वजह से ऑयल महंगा हो जाएगा जिससे इम्पोर्ट पर भी काफी खर्च आएगा। 2018-19 में भारत के क्रूड ऑयल इम्पोर्ट का खर्चा लगभग 1.82 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। गुरुवार को एक डॉलर की कीमत 70.15 रुपये थी। रुपये का यह स्तर अब तक का सबसे निचला स्तर है।

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एक अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि इस वित्त वर्ष की शुरुआत में 65 डॉलर प्रति बैरल की दर से लगभग 7.02 लाख करोड़ रुपये(108अरब डॉलर) का क्रूड ऑयल इम्पोर्ट करने का प्रोजेक्ट था। लेकिन 14 अगस्त तक एक्सचेंज रेट 67.6 प्रति डॉलर थी। अब यदि रुपया 70 के आसपास रहता है तो इस इम्पोर्ट में का खर्चा 114 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। भारत मे लगभग 80 प्रतिशत ऑयल इम्पोर्ट होता है।

ट्रेड डेफिसिट को भी लगेगा तगड़ा झटका

ऑयल इम्पोर्ट का बिल बढ़ जाने से भारत मे ट्रेड डेफिसिट पर भी खासा असर देखने को मिलेग्स। जुलाई में यही ट्रेड डेफिसिटी 18 अरब डॉलर था जो पिछले 5 साल के सबसे ऊँचले स्तर पर है। अगर रुपया ऐसे ही कमजोर होता गया तो आने वाले समय मे ट्रेड डेफिसिटी के हालात काफी बदत्तर हो सकते है। ट्रेड डेफिसिटी से करंट एकाउंट की डेफिसिटी प्रभावित होती है जो इकॉनमी के पक्ष में नही है।

पेट्रोल-डीजल भी होंगे महंगे

दिन-ब-दिन कमजोर होते रुपये की वजह से इस महीने के अंत तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की कीमतें भी बढ़ जाएगी। वहीं इससे ऑयल एंड नैचुरल गैस (ONGC) जैसे ऑयल प्रोड्यूसर्स के साथ ही एक्सपोर्टर्स की अर्निंग बढ़ेगी। ओएनजीसी अमेरिकी डॉलर के टर्म में रिफाइनर्स को बिलिंग करती है।

बढ़ सकती है महंगाई

इसी रुपये और डॉलर के चक्कर मे खान-पान की छिजें भी महंगी होगी। इनके ट्रांसपोर्ट में डीजल की खपत होती है। ऐसे में यह छिजें भी महंगी होगी। इसके साथ ही एडिबल ऑयल भी महंगा हो जाएगा। पेट्रोलियम महंगा होने से शैम्पू, साबुन आदि महंगे हो जाएंगे।

कारें और टीवी हो सकते हैं महंग

ऑटो इंडसटी में भी लागत और खर्च बढ़ जाएगा। डीजल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट पर भी खर्च आएगा। अगर ऐसे ही रुओय में निरंतर गिरावट होती रही तो आने वाले समय में कार आदि का मूल्य बढ़ सकता है। इसके साथ ही कमर्शियल वाहनों की कीमतें भी बढ़ने के आसार है।

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