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सुबह उठकर बोला गया यह मंत्र, नवग्रह और देवताओं को करता है प्रसन्न, दुर्भाग्य होता है दूर…..

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अगर किसी की कुंडली मे नव ग्रहों का दोष होता है तो उसकी जिंदगी में अमंगल ही अमंगल होता रहता है। देवी देवता भी उस इंसान से रुष्ट हो जाते है। इस वजह से उस इंसान के घर परिवार की सुख शांति छिन जाती है।

कुंडली मे इन नवग्रहों के दोष को दूर करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कई तरह के उपाय बताए जाते है। ज्योतिष के अनुसार सुबह स्नान करके कई तरह के पूजा पाठ कर सकते है। लेकिन उज्जैन के ज्योतिषी मनोज शर्मा का कहना है कि ऐसे कई शुभ काम है जो बिना नहाए भी किए जा सकते हैं।

क्या है वो शुभ काम….

शास्त्रो के अनुसार हर इंसान को सूर्योदय से पहले ही उठ जाना चाहिए। देर तक सोने वाले इंसान का भाग्य साथ नही देता और उसकी बुद्धि भी खराब हो जाती है।

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हर स्त्री और पुरुष को रोज सुबह जागते ही इस मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए।

मंत्र-

ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च।

गुरुश्च शुक्रः शनि राहुकेतवः कुर्वन्तु सर्वे ममसुप्रभातम्॥

इस मंत्र के जाप से देवताओं की कृपा होती है और नो ग्रहों के दोष भी शांत होते है। इस मंत्र का शाब्दिक अर्थ होता है कि , विष्णु, शिव, सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु सभी मिलकर मेरी इस सुबह को और अधिक मंगलकारी बनाए। यह शुभ काम बिना नहाए भी किया जा सकता है।

इंसानी हाथ के आगे के भाग में लक्ष्मी, मध्य भाग में सरस्वती और मूल भाग में विष्णु का निवास होता है। रोज सुबह नींद से उठते ही सबसे पहले अपनी हथेलियों में देखे और इस मंत्र का जाप करें।

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले तू गोविंद: प्रभाते करदर्शनम्॥

हिन्दू धर्म मे धरती को मां का दर्जा दिया गया है। इसलिए हर रोज सुबह उठते ही भूमि पर पांव रखने से पहले इस इस मंत्र का जाप करते हुए भूमि से क्षमा मांगी की माता होते हुए भी मुझे आप पर पैर रखने पड़ रहा है।

समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डिते। विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे।

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