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जब अटल बिहारी वाजपेई ने नरेंद्र मोदी को CM बनाने के लिए किया फोन, उस समय मोदी शमशान में थे

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BJP की तरफ से देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के बाद श्री नरेंद्र मोदी ही बने हैं. पर मोदी को सीएम बनाने की खुशखबरी श्मशान घाट में मिली थी. आइए बताते हैं पूरी खबर

BJP सरकार को 2011 में गुजरात के भुज के भूकंप आ जाने के बाद कई आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था विपक्ष ने उन पर यह आरोप लगाया कि भूकंप के अंदर वह रिकॉर्ड ढंग से नहीं संभाल पाए. 90 के अंत के दशक में बीजेपी की सरकार गुजरात में लड़खड़ा रही थी,क्योंकि केशुभाई पटेल, शंकरसिंह वाघेला जैसे नेता सत्ता पाने के लिए आपस में भिड़ गए थे. इन सबके बीच में एक अलग चेहरे नरेंद्र मोदी को दिल्ली में भेज दिया गया. मोदी जी अपना अधिकतम समय दिल्ली के पार्टी ऑफिस में बिताते थे. लालकृष्ण आडवाणी और मोदी जी पहले से ही करीब थे,इसी कड़ी में उनका परिचय अटल बिहारी वाजपेई से हो गया. इसी दौरान वाजपेई ने उनकी प्रतिभा को पहचाना.

गुजरात के भुज में जब भूकंप आया तो गुजरात के केशुभाई पटेल के नेतृत्व वाली BJP सरकार को विपक्ष ने लगभग गिरा दिया था. उन पर अनेक आरोप लगाए कि उनको स्थिति को ढंग से संभालने की क्षमता नहीं है, जिस कारण उपचुनाव में पार्टी को भारी नुकसान हो गया था. पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई क्योंकि पार्टी का रुतबा गिरता जा रहा था. इसलिए वाजपेई जी ने नरेंद्र जी मोदी को 2001 के सत्र में एक दिन फोन करके पूछा कि इस वक्त आप कहां हैं क्या आप मुझसे मिलने के लिए आ सकते हैं.

जब मोदी जी ने इस बात का जवाब दिया कि वह कहां है तो वाजपेयी जी चिंता में पड़ गए. मोदी जी ने उनको बताया कि वह अभी श्मशान घाट में है, तो वाजपेयी जी ने कुशलक्षेम पूछा कि सब कुशल क्षेम तो है. मोदी जी ने बताया कि वह पत्रकार गोपाल के अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट आए हुए हैं. पत्रकार गोपाल की माधवराव सिंधिया के साथ एक प्लेन में बैठे थे और वह प्लेन क्रैश होने के कारण उनकी मृत्यु हो गई. हर कोई सिंधिया की अंतिम यात्रा में तो आया था लेकिन उनके अंतिम संस्कार के लिए 2-3 मित्रों को छोड़कर कोई भी नहीं आया था इसलिए सांत्वना व्यक्त करने के लिए वे खुद आ गए है।

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जब नरेंद्र मोदी दिल्ली पहुंचे तो वाजपेई जी ने उन्हें गुजरात की गद्दी संभालने का जिम्मा दिया. इस तरह 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बन गए और उस दिन के बाद से लगातार राजनीति में अपने परचम लहराने लग गए. बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचने वाले दूसरे नेता बन गए.

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