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इस मां ने अपने बेटे के इलाज के लिए किया कुछ ऐसा, जिसे जान आपकी आंखों से छलक आएंगे आंसू

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आज हम आपको जिस कहानी के बारे में बताने वाले हैं वो उस मां की कहानी है जिसने अपने जवान बेटे की बीमारी के इलाज के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. एक ऐसी मां जो कि आंखों से तो देख नहीं पाती लेकिन उसने फिर भी अपने बेटे की पीड़ा को अपने मन की आंखों से देख लिया. तो उसने अपने बेटे के लिए कुछ ऐसा काम किया जो कि समाज की नजरों में एक मिसाल बन गया.

दरअसल हम बात कर रहे हैं राजस्थान के सीकर जिले की रहने वाली उस महिला के बारे में, जिसने अपने बेटे के इलाज में अपनी जमा पूंजी. यहां तक कि अपने सुहाग की निशानी को भी दांव पर लगा दिया, लेकिन अब बेटे के इलाज की व्यवस्था नहीं देख पाना उसी मां के लिए एक परेशानी का सबब बन गया है. इसके आगे की जो दास्तां है वह बड़ी ही दर्दभरी है.

हरिजन बस्ती में रहने वाले 30 साल के शंकर की दोनों ही किडनी फेल हो चुकी हैं. फिर भी बुढ़ापे में यह बुजुर्ग मां शांति अपने बेटे के ठीक होने की आस लिए बैठी है और अपने खराब हालातों से जूझ रही है. शादीशुदा शंकर की दोनों किडनी खराब हो चुकी हैं. शंकर को जिंदा रहने के लिए हर 7 से 15 दिन में डायलिसिस करानी पड़ती है. इसके बाद ही शंकर को कुछ दिन तक आराम मिल पाता है.

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शंकर का यह डायलिसिस इलाज काफी महंगा पड़ रहा है. वही इन दोनों को सहारा देने के लिए उस बस्ती में रहने वाले लोग और परिजन भोजन आदि की व्यवस्था कर रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि शंकर का निजी अस्पताल में किडनी के लिए डायलिसिस कराना बड़ा ही महंगा है और अब इस मां के पास भी इतने पैसे नहीं है कि वह उसका इलाज करा सके. सरकारी अस्पताल वाले ऐसे जवाब दे देते हैं कि जैसे किस्मत कोई मजाक कर रही हो. जब भी मां-बेटे ने सरकारी अस्पताल की तरफ अपना रुख किया तो उन्हें 5 दिन के इंतजार के बाद इलाज का वक़्त दिया गया.

65 साल की वह बूढ़ी मां शांति देवी अपने पति की मौत के बाद से अपने बेटे की बीमारी की वजह से बिल्कुल टूटती जा रही है. शांति इससे पहले बुढ़ापे के सहारे रहे अपने बड़े बेटे और एक बेटी को भी बीमारी की वजह से खो चुकी है. ऐसे में अगर उसके बेटे शंकर को कुछ हो जाता है तो इस बूढ़ी मां का ख्याल रखने वाला कोई नहीं है. इसलिए शांति ने शादी में मिले कंगन, चांदी की पाजेब सब कुछ बेच दिया, बस इसलिए कि उसका बेटा संकट ठीक हो जाए. अब से थोड़े दिन पहले ही शंकर का एक मासूम बेटा करंट लगकर खत्म हो चुका है. इस परिवार के पीछे बदनसीबी तो ऐसे हाथ धोकर पड़ी है कि मां को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा कि आखिर वह करें तो करें क्या.

शंकर के ससुराल वालों ने भी बहुत मदद की, लेकिन अब इन दोनों मां बेटे की हालत बहुत खराब हो चुकी है. शंकर की मां अब देख नहीं पाती, लेकिन वह दिलासा हमेशा ठीक होने का ही देती है. वही चिकित्सकों का कहना यह है कि नियमित इलाज नहीं मिलने पर कुछ भी हो सकता है. शांति कुछ साल पहले तक साफ-सफाई करके कुछ पैसे भी कमा लिया करती थी, लेकिन अब बढ़ती उम्र के साथ उसके शरीर ने भी उसका साथ छोड़ रखा है.

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