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पेन किलर की दवा लेनी पड़ी भारी, झुलस गया पूरा शरीर, डॉक्टर भी है हैरान…..

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इंग्लैंड में एक 10 साल की बच्ची के साथ वह घटना हुई जिसको देखकर डॉक्टर भी चौंक गए। बच्ची के शरीर में दर्द हो रहा था। जिसकी वजह से उसने कोई दवाई खाई थी। दवाई खाते ही उस बच्ची का शरीर आग में जलने के समान चिपक गया। डॉक्टर्स को ऐसा लग रहा था कि वह एक रात भी नहीं निकाल पाएगी लेकिन बच्ची अभी भी जिंदा है। काफी जांच के बाद पता लगा है पेनकीलर की दवा खाने से उसको एलर्जी हो गई थी। जिससे उसका मुंह और आंखें अजीब से लिक्विड भरने की वजह से चिपक गई थी।

दर्द कम होने के साथ ही जलने लगा शरीर
10 साल की एलेक्सा केस्पेल ट्राइजेमिनल न्यूर्रो ल्जिया नामक बीमारी से ग्रसित है। इस बीमारी से पीड़ित की नसों में दर्द होने लगता है। जिसके लिए डॉक्टर ने एलेक्सा को एनाल्जेसिक नाम की दर्द की दवा खाने को दी थी। जैसे ही एलेक्सा ने दवा खाई तो उसका दर्द कम होने लगा। पर दर्द कम होने के साथ-साथ उसका चेहरा, कान, गर्दन आदि जलने के समान धब्बे दिखाई देने लग गए थे। जैसे उसका शरीर भयानक तरीके से जला हुआ हो।
धीरे धीरे यह दाग धब्बे बढ़ते ही जा रहे थें। पीड़ित का कहना है कि उसको ऐसे लग रहा था कि उसके शरीर को कोई काट रहा है। जल्द ही बच्ची को हॉस्पिटल पहुंचाया गया तो। डॉक्टर्स भी कंडीशन को नहीं समझ पा रहे थे। इस कारण यह पीड़ित के लिए ओर समस्या खड़ी कर रहा था। इसके लिए पहले एलेक्सा की मां ने एक रास्ता निकाला और उसने अपनी बेटी की यह फोटो सभी हॉस्पिटल में ईमेल कर दी। जांच के लिए पता लगाने को कहा। तरह-तरह के जवाब आने लगे जिससे उसकी मां को गुस्सा आने लगा। एक हॉस्पिटल ने उन्हें यह जवाब दिया कि यह स्थिति तो दाग की वजह से हो गई है।

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मुश्किल से बीमारी का पता चल पाया
डॉक्टर ने काफी मुश्किलों के बाद पता लगया कि लड़की को दर्द की दवा लेने से एलर्जी हो गई थी। जिससे लड़की जोन्सन्स सिंड्रोम नाम की बीमारी का शिकार हो गई थी। इस कारण लड़की को बर्न यूनिट में शिफ्ट किया गया। सर के बालों को उतार दिया गया और फाइल चढ़ा दी गई। डॉक्टर ने कहा कि लड़की का 1 रात भी जीना मुश्किल है।
भूल गई यादाश्त
डॉक्टर के जवाब देने के बाद भी लड़की जिंदगी की जंग जीत गई। 2 हफ्ते बेहोश रहने के बाद उसने आँखे खोली। पर लड़की अपनी याददास्त खो चुकी थी।हर काम को उसे दुबारा सीखना पद रहा है। इस बीमारी के कारण उसका शरीर के आँखे और मुह में लिक्विड भर गया था। 6 हफ़्तों के बाद उसे घर ले जाया गया। अब पीडित को 1 साल हो चुके है पर फिर भी उसे हर काम में दिक्कत होती है।
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