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कार सुरक्षा पैमाने में भारत है काफी फिसड्डी, इन देशों की बराबरी करने में लगेंगे 20 साल

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भारत में बिकने वाली कारों में एसयूवी नेक्सन को यूरोपियन न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम ने Tata की सबसे सुरक्षित कार बताया है। ग्लोबल ऐनकेप के चेयरमैन Max मसाले ने कहा है की भारत में छोटी कारों की बिक्री बहुत ज्यादा होती है। इस कारण भारत में कारों की सुरक्षा चिंताजनक बन गई है। कई कार क्रैश टेस्ट में फेल हो रही है। जो कि महंगी महंगी कारें हैं। भारत यूरोप उत्तरी अमेरिका के सामान्य 5 स्टार मानको की बराबरी करने में उसे 20 साल और लग जाएंगे।

भारत में सस्ती गाड़ियों का चलन बहुत ज्यादा है।इस कारण कंपनी अपनी मार्केटिंग बढ़ाने के चक्कर में सस्ती कारों को बाजार में उतारती है। और ग्राहकों की जान से सौदा कर लेती है। सस्ति कार को बनाने के चक्कर में वे गाड़ी के ढांचे को कमजोर बनाने के साथ-साथ एयर बैग भी नहीं देती है।

भारत के ग्राहक कार की सुरक्षा फीचर को ज्यादा महत्व ने देते हुए गाड़ी के माइलेज के बारे में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। इस कारण कंपनियां माइलेज बढ़ाने के चक्कर में गाड़ी को फाइबर मेटेरियल का बनाकर उसका वजन कम सकती है। वजन कम होने के कारण गाड़ी माइलेज अच्छा देगी। भारत सस्ति कार बेचने के मामले में एक बहुत ही बड़ा मार्केट बन गया है। सुरक्षा फीचर वाली कारे बहुत महंगी होती है। वह भारत में ज्यादा बिकती नहीं है। विदेशी कंपनियां भी भारतीय बाजार में सस्ती कारे ज्यादा उतार रही है।

भारत सरकार 2017 से वाहनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। वो इस मुद्दे पर ठोस कदम उठा रही है। भारत सरकार जल्द ही सुरक्षा मानको को लेकर देश में स्पष्ट नीति लगाएगी। हाल ही में यह नीति हमारे देश में लागू नहीं है। इस कारण निर्माता सुरक्षा मानको को नजरअंदाज कर देते हैं ।और उन्हें महंगी गाड़ी में ही लगाते हैं। एयर बैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम सस्ती कार में देखने को नहीं मिलता है।

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लगातार सुरक्षा मानको में फेल हो रही कारों की बिक्री का बढ़ रहा है आंकड़ा

2017 एवं 18 के साल में पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा कारे खरीदी गई है। छोटे शहरों में ज्यादा खरीददारी हुई है। क्योंकि महानगरों में पार्किंग समस्या एक बहुत बड़ी समस्या हो रही है। मेट्रो के चलने के कारण कारों की लोकप्रियता घटती जा रही है। कस्बो में वाहनों की मांगे उपयोगिता पिछले वर्ष रिकॉर्ड पर रही थी।

पिछले साल में 3300000 वाहनों की बिक्री हुई थी जो 7. 89 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाती है। भारत के अंदर आंकड़े जारी हुए थे जिनके अनुसार वित्त वर्ष 2017 एवं 18 में यात्री वाहन 3287965 खरीदे गए थे। जो कि 7. 89 प्रतिशत अधिक थे पिछले साल की तुलना में।इसे पहले यात्री वाहन 3047582 ही वाहन ख़रीदे गये थे।

कारों की सुरक्षा को जांचने के लिए 1997 में यूरोपियन न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम की शुरुआत की गई थी। यह नई-नई कारों को तोड़ता है। और जानकारी जुटाता है कि यह कार कितनी सेफ है। आमतौर पर पेसेंजर कारों का क्रैश टेस्ट होता है। जिस से पता लगाया जाता है कि ड्राइवर पैसेंजर और पैदल यात्रियों के लिए यह कितनी सेफ है। यह सारा टेस्ट लेब में होता है और अलग-अलग एंगल से करवाया जाता है। जिससे सारे आंकड़ो को जोड़कर अगली कार को सुरक्षा मामलों में और अधिक जबरदस्त बनाया जा सके।

अलग-अलग पेमानो पर होता है टेस्ट

फ्रंटल इम्पैक्ट, इस टेस्ट में कार को अपने बराबर के वजन वाले ढांचे से 64 किलोमीटर की रफ्तार से सीधे जाकर टकराना होता है।

साइड इम्पैक्ट, इसके अंदर साइड की टक्कर का टेस्ट किया जाता है।

पोल इम्पैक्ट, इस टेस्ट में कार को किसी खंबे या पेड़ से टकराकर उसकी जांच की जाती है।

पेडेस्ट्रियन प्रोटेक्शन, इसके अंदर यह पता लगाया जाता है कि अगर कार किसी पैदल यात्री को टक्कर मार दे तो इससे उसको कितना नुकसान होता है।

कुछ सालों से अंतरराष्ट्रीय एजेंसी भारत में बिकने वाली कारों का टेस्ट करवा रही है। जिनमें टाटा की एसयुवी नेक्सन को टेस्ट में पास किया गया। लेकिन कई कारे पूरी तरह से इस टेस्ट में फ़ैल हो गई।

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